मुआवजे के लिए किसानों का हल्लाबो, लाखांदूर तहसील के किसानों का उग्र प्रदर्शन

लाखांदूर तहसील के किसानों ने मुआवजे के लिए किया उग्र प्रदर्शन, सरकार से तत्काल मदद की मांग।
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Bhandara News: मई और अक्टूबर 2025 में हुई भारी बारिश ने लाखांदूर तहसील के धान उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी थी.फसलें बर्बाद हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिलने से किसानों का धैर्य जवाब दे गया है. सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने लाखांदूर तहसील कार्यालय पर धमक देकर जोरदार प्रदर्शन किया.

शिवसेना यूबीटी के तहसील प्रमुख विनोद ढोरे के नेतृत्व में किसानों ने तहसीलदार वैभव पवार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर अपनी व्यथा सुनाई. इस दौरान किसानों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने तक की मांग कर डाली.

आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने 2025 के नुकसान के पंचनामे तो समय पर पूरे कर लिए थे, लेकिन मार्च 2026 में केवल 30 प्रतिशत किसानों की ही केवाईसी सूची प्रकाशित की गई. विडंबना यह है कि केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के 11 महीने बाद भी अधिकांश किसानों के खातों में फूटी कौड़ी तक जमा नहीं हुई है.

दूसरी सूची का इंतजार करतेकरते दो महीने और बीत गए हैं, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के माध्यम से खरीदे गए उपकरणों का 202526 का अनुदान भी लंबित है.

अतिवृष्टि की रुकी हुई मुआवजा राशि तुरंत खातों में जमा की जाए. दूसरी KYC तत्काल प्रकाशित होलंबित दूसरी केवाईसी सूची तत्काल प्रकाशित हो. कृषि उपकरणों और खाद पर बकाया सब्सिडी का भुगतान हो. धान खरीदी की मर्यादा बढ़ाकर किसानों को राहत दी जाए.

इन मांगों को लेकर किसान उग्र हुए. किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आगामी दिनों में और भी तीव्र आंदोलन किया जाएगा.इस विरोध प्रदर्शन में ताराचंद मातेरे, लोचन पारधी, विनायक सरोदे, संदीप खरकाटे, तुलसीदास मेश्राम, प्रभु बगमारे, गणेश दोनाडकर सहित सैकड़ों किसान उपस्थित थे.

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