Bhandara: दिघोरी PHC बदहाली के कगार पर, डॉक्टरों की भारी कमी, जर्जर इमारत और स्वास्थ्य सेवाएं ठप!

Rural Healthcare Issues: दिघोरी मोठी PHC में डॉक्टर और कर्मचारियों की भारी कमी, इमारत जर्जर, प्रसूति व आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं ठप। ग्रामीणों में बढ़ी नाराज़गी।
Rural Healthcare Issues: दिघोरी मोठी PHC में डॉक्टर और कर्मचारियों की भारी कमी, इमारत जर्जर, प्रसूति व आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं ठप। ग्रामीणों में बढ़ी नाराज़गी।
दिघोरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (सौजन्य-नवभारत)
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Staff Shortage in Health Centre: दिघोरी / मोठी गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की ओर लंबे समय से जारी प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। केंद्र में कर्मचारियों की भारी कमी, इमारत की जर्जर स्थिति, बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

वहीं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का समय पर न मिलना, दिघोरी मोठी के नागरिकों में तीव नाराजगी का कारण बन गया है। नागरिकों का कहना है कि शासन की नीतिगत कमियों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।

कर्मचारी और डॉक्टरों की कमी

इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवक, सेविका और डॉक्टरों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। उपलब्ध कर्मचारियों के भी मनमानी तरीके से काम करने की शिकायतें बढ़ रही हैं। नतीजतन, केंद्र की दैनिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को समय पर आवश्यक उपचार मिलना कठिन हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि मरीजों को तत्काल उपचार के लिए भी इंतजार करना पड़ता है।

केंद्र की जर्जर स्थिति और असुरक्षा

दिघोरी मोठी का यह स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में अत्यंत जर्जर स्थिति में है। इमारत टूटी फूटी है और कई कमरों की छतें गिरने की कगार पर हैं। टूटी हुई खिड़कियां और दरवाजे मरीजों के लिए सुरक्षा का सवाल खड़ा करते हैं। इमारत की इस दयनीय स्थिति के कारण मरीजों को असुरक्षित माहौल में उपचार के लिए रुकना पड़ता है। कई बार कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण, यहां के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा के लिए पास के गांव या सीधे तहसील मुख्यालय के अस्पताल की ओर भागना पड़ता है।

महत्वपूर्ण सेवाओं का गंभीर अभाव

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति (Maternity) सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं, साथ ही, अन्य विशेष आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं, आपातकालीन मरीजों और वृद्ध नागरिकों को उपचार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा

गांव वालों द्वारा इस स्वास्थ्य केंद्र की समस्याओं को लेकर बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, संबंधित प्रशासन समस्याओं को हल करने के लिए किसी भी प्रकार की पहल नहीं कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे यहां के नागरिकों में प्रशासनिक उदासीनता के प्रति तीव्र गुस्सा है।

गांव के नागरिकों ने प्रशासन और जन प्रतिनिधियों से तत्काल उपाय करने, केंद्र के सभी रिक्त पदों को तुरंत भरने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सक्षम रूप से कार्यरत करने की जोरदार मांग की है। साथ ही, केंद्र में शौचालय और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिन्हें तुरंत उपलब्ध कराने की मांग की गई है।