भंडारा के आदिवासी गांवों में मत्स्य क्रांति की तैयारी, पीएम मत्स्य संपदा योजना से मिलेगा लाभ

भंडारा जिले में 14 गांवों के लिए धरती आबा अभियान शुरू, 90% सब्सिडी के साथ मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा।
भंडारा के आदिवासी गांवों में मत्स्य क्रांति की तैयारी, पीएम मत्स्य संपदा योजना से मिलेगा लाभ
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Dharti Aba Abhiyan Bhandara News: भंडारा जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोलने के लिए मत्स्य विभाग की ओर से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू किया गया है।

इस महत्वाकांक्षी अभियान के माध्यम से आदिवासी समुदाय के युवाओं और मत्स्य व्यवसायियों को आधुनिक मछली पालन से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग ने भंडारा जिले के 14 आदिवासी गांवों का चयन इस विशेष योजना के लिए किया है, जहां लाभार्थियों को मत्स्य पालन से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं पर 90 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इस अभियान की अवधि अगले पांच वर्षों यानी वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक निर्धारित की गई है, जिसके दौरान चयनित गांवों के जनजातीय परिवारों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार लाने का रोडमैप तैयार किया गया है।

योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं और सहायता की बात करें तो पात्र निवासियों को मछली पालन की पूरी श्रृंखला के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी। इसमें नए तालाबों के निर्माण से लेकर मछली बीज उत्पादन की इकाइयां स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा, मछली पालन के लिए आवश्यक इनपुट, उच्च गुणवत्ता वाले जाल, नाव और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद पर भी बड़ा अनुदान दिया जाएगा।

विभाग का विशेष जोर इस बात पर है कि स्थानीय स्तर पर ही मछली बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन की क्षमता को कई गुना बढ़ाया जाए।

भंडारा जिले में योजना का भौगोलिक विस्तार

तुमसर तसील के सर्वाधिक गांवों को इस अभियान में जगह मिली है। चयनित गांवों की सूची में तुमसर तहसील के सुसुरगेट, चिखली, पवनारखारी, सुंदर टोला, खापा खुर्द और लेंडेझरी शामिल हैं। इसके अलावा भंडारा तहसील के राव गांव भी इस योजना का हिस्सा हैं।

इस प्रकार, धरती आबा अभियान से भंडारा जिले के 14 गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, जो आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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