Bhandara News: असुविधाओं के बीच देखें जा रहे साक्षरता के सपने, भंडारा में स्कुलों की चौकाने वाली स्थिति

Bhandara School Facilities: विश्व साक्षरता दिवस पर भंडारा की जिला परिषद स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सामने आई है। जिले की 794 स्कूलों में प्रधानाध्यापक कक्ष नहीं है।
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भंडारा जिला परिषद स्कूल (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Zilla Parishad Schools Bhandara: विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर जिलेभर में साक्षरता के महत्व का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन इसी बीच जिला परिषद स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का दूसरा पहलू भी सामने आया है। जिले की 794 जिला परिषद स्कूलों में सीमा दीवार, पुस्तकालय, खेल मैदान, प्रधानाध्यापक कक्ष और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के मामले में अब भी उल्लेखनीय कमी दिखाई देती है।

पानी और बिजली की स्थिति संतोषजनक

जिले की 794 जिला परिषद स्कूलों में से 792 स्कूलों में पेयजल सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दर्ज है। वहीं 783 स्कूलों में बिजली की सुविधा है। लड़कों के लिए शौचालय 784 और लड़कियों के लिए शौचालय 791 स्कूलों में उपलब्ध हैं। मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक नजर आती है, लेकिन इन सुविधाओं की गुणवत्ता, स्वच्छता और नियमित उपयोग की स्थिति का अलग से आकलन किया जाना जरूरी है।

पुस्तकालयों की संख्या अब भी कम

विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में पुस्तकालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद जिले की 794 जिला परिषद स्कूलों में से केवल 727 स्कूलों में पुस्तकालय उपलब्ध है। यानी 67 स्कूल अभी भी पुस्तकालय की सुविधा से वंचित हैं। विश्व साक्षरता दिवस के संदर्भ में यह आंकड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। साक्षरता का अर्थ केवल अक्षर पहचानना नहीं, बल्कि पढ़ने की आदत, समझने की क्षमता और व्यापक ज्ञान विकसित करना भी है। ऐसे में प्रत्येक स्कूल में समृद्ध और विद्यार्थियों द्वारा नियमित रूप से उपयोग किए जाने वाले पुस्तकालय की आवश्यकता है।

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मैदान के साथ सीमा दीवार का भी सवाल उत्पन्न

जिले की 794 स्कूलों में से 46 स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। वहीं इससे भी गंभीर स्थिति सीमा दीवार को लेकर है। 227 स्कूलो में सीमा दीवार नहीं है। 469 स्कूलों में स्वतंत्र प्रधानाध्यापक कक्ष नहीं है। स्कूल के प्रशासनिक कामकाज, रिकॉर्ड रखने और

अभिभावकों व शिक्षकों के साथ आवश्यक बैठक के लिए अलग कक्ष की आवश्यकता होती है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं पर भी ध्यान जरूरी है। 789 स्कूलों में रैंप की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्र शौचालयों की संख्या काफी कम है। दिव्यांग लड़कों के लिए स्वतंत्र शौचालय 427 स्कूलों में, जबकि दिव्यांग लड़कियों के लिए केवल 325 स्कूलों में उपलब्ध है।

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