भंडारा में सुनीता डोमले ने पेश की महिला सशक्तिकरण की मिसाल, फूड स्टॉल से प्रतिदिन कमा रहीं 2 हजार रुपये

भंडारा की सुनीता डोमले ने उमेद अभियान के तहत मोबाइल फूड स्टॉल के जरिए आत्मनिर्भरता की राह चुनी है। वे प्रतिदिन 2500 रुपये तक की आय कर अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।
bandra-510
Published on
Updated on

Bhandara Umed Abhiyan News: भंडारा दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही अवसर मिलने पर एक सामान्य गृहिणी भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकती है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण भंडारा शहर में देखने को मिल रहा है, जहां उमेद अभियान के तहत अथांग महिला बचत समूह की सदस्य सुनीता डोमले ने खाद्य पदार्थों के व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है।

गणेशपुर चौक स्थित जिला परिषद परिसर में प्रभाग संघ द्वारा अथांग महिला बचत समूह को एक सुसज्जित मोबाइल फूड स्टॉल वाहन उपलब्ध कराया गया। समूह की 10 महिला सदस्यों ने इस स्टॉल की जिम्मेदारी मेहनती सदस्य सुनीता डोमले को सौंपी। यह स्टॉल उन्हें मासिक 6,500 रुपये किराए पर दिया गया है। व्यवसाय शुरू करने के लिए सुनीता ने शुरुआती तौर पर 4 से 5 हजार रुपये का निवेश किया। धीरेधीरे उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और दो जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार भी दिया, जिससे उनका आर्थिक संबल बढ़ा।

अनुशासन और निरंतर मेहनत के बल पर उनका यह छोटा व्यवसाय आज सफलतापूर्वक स्थापित हो चुका है। खाद्य पदार्थों की घरेलू स्वादइस स्टॉल की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाले खाद्य पदार्थों की घरेलू स्वाद है।

व्यस्त गणेशपुर चौक और आसपास के सरकारी कार्यालयों के कारण यहां ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रहती है। सुबह के समय पोहा, उपमा, इडली, सांभर वड़ा जैसे नाश्ते के पदार्थ उपलब्ध रहते हैं, वहीं गर्मियों में छाछ, दही और पापड़ जैसी चीजों की भी व्यवस्था की गई है।

शुद्धता और स्वाद के कारण यह स्टॉल कम समय में ही लोगों की पसंद बन गया है। प्रतिदिन 2 हजार की आयआज इस व्यवसाय से प्रतिदिन औसतन 2 से 2,500 रुपये की आय हो रही है। किराया और कर्मचारियों के वेतन के बाद भी सुनीता को अच्छा लाभ मिल रहा है।

घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक प्रगति हासिल कर उन्होंने महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उमेद अभियान के माध्यम से जिले में हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

सुनीता डोमले की सफलता कहानी न केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं की बदलती सोच और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है। उनके इस प्रयास से अन्य बचत समूहों में भी उत्साह का माहौल है और भविष्य में इस व्यवसाय का विस्तार कर अधिक महिलाओं को रोजगार देने की योजना बनाई जा रही है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com