Bhandara Bawanthadi Dam News: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय संयुक्त परियोजना बावनथड़ी राजीव सागर में जल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। वर्तमान में इस बांध में केवल 39.49 प्रतिशत जल भंडार ही शेष बचा है। जल संकट की यह आहट ऐसे समय में आई है जब अभी भीषण गर्मी का दौर शुरू ही हुआ है। इस परियोजना पर तुमसर तहसील के हजारों किसानों की रबी फसल और कई गांवों की प्यास टिकी हुई है।
ऐसे में घटते जल भंडार ने भविष्य की योजना और जल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बावनथड़ी परियोजना तुमसर तहसील के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बावनथड़ी नदी पर बने इस बांध की कुल जल भराव क्षमता 344.40 मीटर है, लेकिन फिलहाल वाटर लेवल 339.90 मीटर पर पहुंच गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लाइव स्टोरेज 100.57 एमएम3 रह गया है। भंडारा जिले में इस परियोजना के माध्यम से लगभग 5800 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसल को सिंचाई सुविधा देने की योजना है। अब तक रबी फसल के लिए तीन राउंड पानी दिया जा चुका है और चौथे राउंड की आपूर्ति वर्तमान में जारी है।
इसके बाद फसल को पकने के लिए दो और राउंड पानी देना शेष है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सिंचाई के लिए पानी देने के बाद यदि पीने के पानी की किल्लत होती है, तो उसकी पूर्ति कहां से की जाएगी।
फूटी नहरों से व्यर्थ बहता है पानी। परियोजना की एक बड़ी समस्या नहरों की जर्जर हालत भी है। वर्षों से मरम्मत न होने के कारण नहरें जगह-जगह से टूट चुकी हैं। इन फूटी हुई नहरों की वजह से बड़े पैमाने पर पानी व्यर्थ बह जाता है, जिससे टेल यानी अंतिम छोर पर स्थित गांवों के किसानों तक पानी पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
नहरों की मरम्मत के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर शासन-प्रशासन को भेजे गए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कई गांवों में न गहरा जाएं जल संकट।
बावनथड़ी बांध की लंबाई 6 किलोमीटर 420 मीटर है और इसमें 6 बड़े गेट लगे हैं। यह बांध न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाता है बल्कि क्षेत्र के भूजल स्तर को बनाए रखने में भी सहायक है। हालांकि, इस वर्ष सिंचाई के चक्र और वाष्पीकरण के कारण पानी की उपलब्धता कम आंकी जा रही है।
यदि आने वाले दिनों में पानी की मांग और बढ़ती है, तो तुमसर तहसील के कई गावों में जल संकट गहरा सकता है। किसानों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए नहरों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और शेष जल भंडार का उचित नियोजन किया जाए ताकि रबी की फसल के साथ-साथ पेयजल की जरूरतें भी पूरी हो सकें।