शिवाजी महाराज के पुतले पर BJP का दुपट्टा, भंडारा में फूटा लोगों का गुस्सा, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

Shivaji Maharaj Controversy: भंडारा में शिवाजी महाराज के पुतले पर भाजपा का दुपट्टा डालने से विवाद, ओबीसी क्रांति मोर्चा आक्रामक; आचार संहिता उल्लंघन के आरोप तेज।
Shivaji Maharaj Controversy: भंडारा में शिवाजी महाराज के पुतले पर भाजपा का दुपट्टा डालने से विवाद, ओबीसी क्रांति मोर्चा आक्रामक; आचार संहिता उल्लंघन के आरोप तेज।
शिवाजी महाराज के पुतले पर भाजपा का दुपट्टा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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OBC Kranti Morcha Protest: भंडारा में नगर परिषद चुनाव के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टाकली के वार्ड क्रमांक 2 में भाजपा की चुनावी सभा से पहले भाजपा उम्मीदवारों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के पुतले को भाजपा का दुपट्टा और टोपी पहनाकर प्रचार की शुरुआत की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद शिवभक्तों में भारी रोष पसर गया है।

शिवाजी महाराज के पुतले पर पार्टी दुपट्टा चढ़ाए जाने को लोग सीधे-सीधे महाराज का अपमान बता रहे हैं। चुनावी लाभ के लिए महान योद्धा और स्वाभिमान के प्रतीक शिवाजी महाराज का इस्तेमाल करने पर जनता में गुस्सा फूट पड़ा है। चुनाव आयोग की आचार संहिता लागू होने के बावजूद सार्वजनिक स्मारक और प्रतिमाओं का राजनीतिक उपयोग करने को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं।

ओबीसी क्रांति मोर्चा का आक्रामक रूख

विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इसे आचार संहिता का साफ उल्लंघन बताया है। ओबीसी क्रांति मोर्चा इस घटना के खिलाफ खुलकर आक्रामक हुआ है। ओबीसी क्रांति मोर्चा ने पूरे मामले में चुनाव विभाग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। मोर्चा ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव आयोग को इस घटना पर गंभीर संज्ञान लेकर जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

नगर परिषद चुनाव के चलते भंडारा का राजनीतिक तापमान पहले ही चरम पर है। अब इस घटना ने नई आग भड़का दी है और आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। भंडारा में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

भाजपा अब शिवाजी महाराज को भी नहीं छोड़ रही

शिवाजी महाराज के पुतले पर पार्टी दुपट्टा डालना उनके सम्मान का अपमान है। सिर्फ चुनावी फायदा उठाने के लिए भाजपा अब शिवाजी महाराज को भी नहीं छोड़ रही। हम ऐसे विकृत मानसिकता वाले कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं।

  • संजय मते, संस्थापक अध्यक्ष, ओबीसी क्रांति मोर्चा
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