भंडारा: मक्के के खेत में बिछड़े तेंदुए के शावकों का मां से सफल पुनर्मिलन; साकोली वन विभाग को मिली बड़ी कामयाबी

Bhandara Forest News: भंडारा के साकोली वन क्षेत्र में मक्के के खेत में मिले तेंदुए के दो शावकों को वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद उनकी मां से सुरक्षित मिला दिया है। जानें पूरी रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी
Bhandara Forest Department successfully reunited two leopard cubs with their mother in the Sakoli range after they were found in a maize field. Detailed rescue operation updates.
तेंदुए (सोर्स: नवभारत फाईल फोटो)
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Bhandara Wildlife Rescue: भंडारा साकोली वन क्षेत्र अंतर्गत मौजा सालई रीठी में मक्के के खेत में मिले तेंदुआ मादा के दो शावकों का आखिरकार उनकी मां से सफल पुनर्मिलन कराने में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। उल्लेखनीय है कि मक्का कटाई के दौरान मजदूरों को खेत में ये दोनों शावक दिखाई दिए थे।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दोनों शावकों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया था। वन विभाग ने भटके हुए शावकों को उनकी मां से मिलाने में सफलता हासिल की। यह घटना सानगडी निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार तेजराम बहेकार के खेत में हुई थी। खेत में काम के दौरान अचानक शावक दिखाई देने से मजदूरों में भय का माहौल बन गया था।

कुछ देर बाद मादा तेंदुए ने एक मजदूर पर झपटने की कोशिश की, जिससे क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। वन विभाग ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित करते हुए शावकों की स्वास्थ्य जांच की जिम्मेदारी संभाली। डॉ. मेघराज तुलावी और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ। सव्वाशे की निगरानी में शावकों की नियमित जांच की गई।

शावकों को उनकी मां से मिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। भंडारा के शीघ्र बचाव दल के सदस्य अनिल शेलके, अविनाश नागपुरे, निशी वानखेडे, फगन नेवारे, सुधीर ढेंगे, भूषण मसुरकर, जीवशास्त्रज्ञ शुभम मोदनकर तथा साकोली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी सचिन कटरे के मार्गदर्शन में पूरी योजना बनाई गई।

जिस स्थान पर शावक मिले थे, वहीं उन्हें सुरक्षित रखकर मादा तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। आखिरकार रात में मादा तेंदुआ स्वयं अपने शावकों के पास पहुंची और दोनों को साथ लेकर सुरक्षित जंगल की ओर चली गई। उपवनसंरक्षक योगेंद्रसिंग और सहायक वनसंरक्षक संजय मेंढे के मार्गदर्शन में यह पूरी कार्रवाई बेहद सावधानी से पूरी की गई। फिलहाल साकोली शीघ्र बचाव दल और वन विभाग के कर्मचारी क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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