जातिगत जनगणना पर सवाल: OBC के लिए अलग कॉलम की मांग तेज, भंडारा के सामाजिक संगठनों ने जताया भारी असंतोष

जातिगत जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम न होने पर भंडारा में आक्रोश है। राष्ट्रीय OBC महासंघ ने सटीक जनसंख्या डेटा के बिना सामाजिक न्याय को अधूरा बताया है।
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Bhandara Caste Census News: देशभर में 1 अप्रैल से जातिगत जनगणना को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं होने से असंतोष बढ़ रहा है। जिले के सामाजिक संगठनों और ओबीसी नेताओं ने इसे सामाजिक न्याय के साथ अन्याय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी समाज को उचित प्रतिनिधित्व और योजनाओं का लाभ देने के लिए उसकी सटीक जनसंख्या और सामाजिक स्थिति की जानकारी जरूरी होती है।

मंडल आयोग ने वर्ष 1980 में ओबीसी की आबादी लगभग 52 प्रतिशत बताई थी, लेकिन उसके बाद से कोई आधिकारिक जातिगत जनगणना नहीं हुई। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के पदाधिकारियों ने सरकार के इस निर्णय पर नाराजगी जताई। महासंघ के अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे, महासचिव सचिन राजुरकर, राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अशोक जीवतोडे, इंद्रजीत सिंह, कमलेश गुप्ता, प्रा. शेषराव येलेकर, शरद वानखेडे, सुभाष घाटे, डॉ. प्रकाश भागरथ, दिनेश चोखारे, रत्नमाला पिसे, महिला अध्यक्ष ज्योती ढोकणे, श्रीनिवास जाजुला, शंकर अण्णा, धर्मेंद्र कुशवाह सहित अन्य पदाधिकारियों ने एक स्वर में अलग कॉलम की मांग उठाई।

इस दौरान प्रकाश भागरथ, गुणेश्वर आरिकर, एकनाथ तारमाले, प्रकाश साबले, परमेश्वर राऊत, शिव प्रसाद शाहू, सुरज बेलोकर, ऋतिका डफ, श्रीकांत मसमारे, शकील पटेल, डॉ. मुकेश पुडके, रवी टोंगे, विक्रम गौड़, के. जेड. शेंडे, उमेश सिंगनजुडे, प्रभाकर कलंबे, अंबादास मंदुरकर, सदानंद बुरडे, विजय डवंगे, वाई. टी. कटरे, भावना बावनकर, सोनुने सर, पिनाटे सर और राम कुडाल सहित अनेक ओबीसी समाज के लोगों ने भी नाराजगी व्यक्त की।

नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि जनगणना अधूरी होगी तो न्याय कैसे मिलेगा।

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