

भंडारा. भंडारा संसदीय क्षेत्र में इस बार एनडीए गठबंधन और मविआ गठबंधन के दो तगडे उम्मीदवारों के बीच जंग होने के आसार नजर आ रहे है.हालांकि,अभी भी दोनों ओर से उम्मीदवार कहीं भी नजर नहीं आ रहे है. भाजपा की ओर से जरूर कुछ उम्मीदवार प्रयास कर रहे है. लेकिन हर पल बदलती राजनीतिक तश्वीर में वह कही फीट हो पाएंगे या नहीं कुछ कहना अभी से बेमानी है.
आगामी संसदीय चुनाव को महज 4 माह शेष है लेकिन कांग्रेस के पत्ते अभी भी नहीं खुल रहे है. यही समझ में नहीं आ रहा है कि कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडने की इच्छा कौन रखते है. इसका अर्थ ऐसा कदयपि नहीँ है कि कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कोई कमी है. कुछ उम्मीदवारों ने पहले ही इच्छा व्यक्त की है,लेकिन तैयारी के नाम पर उनके प्रयास सिफर नजर आते है.तैयारी के नाम पर कांग्रेस की कमजोरी इस बार इसलिए दिखाई दे रही है क्योंकि कांग्रेस ने वर्षों तक इस सीट से उम्मीदवार नहीं दिया है.यह सीट अधिकतर सहयोगी रही राष्ट्रवादी कांग्रेस को छोडती रही है, लेकिन अब प्रफुल्ल पटेल की राष्ट्रवादी भाजपा के साथ है और इसलिए अब अपना उम्मीदवार देने के नाम पर कांग्रेस के खेमे में उत्साह बरस रहा है.
वैसे कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कमी नहीं है. सिर्फ तैयारी भर नहीं दिखती, लेकिन इतना निश्चित है कि कांग्रेस के पास कोई तगडा उम्मीदवार नहीं है और इसलिए कांग्रेस ऐन समय पर नाना पटोले को मैदान में उतार सकती है.इसी बात के आसार अधिकतर नजर आ रहे है. अगर ऐसा होता है तो भाजपा में उम्मीदवारी के नाम पर सामने आ रहे तमाम नाम पिछड जाएंगे. मजबूरन भाजपा को भी तगडा उम्मीदवार मैदान में उतारना पड सकता है. इस स्थिति में भाजपा खेमे में दो नामों सामने आते है. इसमें से एक नाम भाजपा के कददावार नेता बन गए परिणय फुके और दूसरा नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रफुल्ल पटेल का है. सवाल यही है कि भाजपा अपने अधिकार की सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए छोडेगी या नहीं? कहा जा रहा है कि केंद्र स्तर पर इस बारे में फैसला लिया जा सकता है. फैसला चाहे जो हो लेकिन पटोले है तो फुके और पटेल के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा.
राज्य में मराठा और ओबीसी के बीच बडी जंग देखने को मिल रही है. मराठा समाज का जिले में बहुत अधिक वजूद नहीं है लेकिन ओबीसी की संख्या लाखों में है और उसे कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.राज्य सरकार की ओर से पिछले कुछ समय पूर्व अपनाई गई कथित भूमिका ने ओबीसी समाज को नाराज कर दिया था.अब अगर नाना पटोले को कांग्रेस उम्मीदवार बनाया जाएगा तो अधिकतर ओबीसी अपने आप नाना पटोले से जुड जाएंगे. इस स्थिति में परिणय फुके के अलावा भाजपा के पास कोई विकल्प नहीं रह पाएगा. बता देना आवश्यक है कि प्रफुल्ल पटेल भी स्वयं को गुजराती कुनबी बताने से गुरेज नहीं करते. दिया