भंडारा पशु वितरण योजना में 11 करोड़ का ‘कागजी’ घोटाला, बिना गाय-भैंस के विभाग ने बेच दिया 13 लाख लीटर दूध!
Bhandara News: लाखांदूर में पशु वितरण योजना में 11 करोड़ के गबन का आरोप। पूर्व सभापति टेंभुर्णे की शिकायत के अनुसार, बिना पशुओं के ही कागजों पर 13 लाख लीटर दूध उत्पादन दिखाया गया।
Bhandara Animal Distribution Scam: भंडारा जिले की लाखांदूर पंचायत समिति अंतर्गत पशुसंवर्धन और दुग्ध विकास विभाग में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। वर्ष 201819 से 202526 के बीच पशु वितरण योजना में लगभग 11,03,40,000 रुपये के आर्थिक गबन का आरोप लगाया गया है।
जिप के पूर्व समाज कल्याण सभापति चंद्रशेखर टेंभुर्णे ने मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई है कि अधिकारियों ने आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर बिना जानवर दिए केवल कागजों पर योजनाएं चलाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है। विभाग ने दावा किया था कि इन योजनाओं से क्षेत्र में दूध उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है।
कुल 118 लाभार्थियों में से 81 लाभार्थियों के पास तो जानवर ही मौजूद नहीं हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि तहसील पशुसंवर्धन अधिकारी डॉ. अश्विनी चौधरी ने स्वयं मार्च 2026 में जारी पत्रों के माध्यम से यह स्वीकार किया है कि 81 लाभार्थियों के पास प्रत्यक्ष रूप से जानवर उपलब्ध नहीं हैं। सवाल खड़ा हो रहा है कि जब पशु ही नहीं थे, तो विभाग ने रिकॉर्ड पर 13 लाख लीटर से अधिक दूध उत्पादन कैसे दिखा दिया।
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आंकड़ों ने खोली प्रशासन की पोलटेंभुर्णे की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं। वर्ष 201819 में चयनित सभी 13 लाभार्थियों के पास जानवर नहीं थे। यही सिलसिला हर साल चलता रहा। वर्ष 202526 में भी 32 में से 17 लाभार्थियों के पास मवेशी नहीं पाए गए।
नियमों को ताक पर रखकर 37 ऐसे लाभार्थियों को दोबारा लाभ दिया गया जो पहले ही योजनाओं का लाभ उठा चुके थे। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व आपूर्तिकर्ताओं से गबन की गई राशि वसूल कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
उत्पादन के दावों में भारी अंतर विभाग ने कुल 13,17,240 लीटर दूध उत्पादन होने का रिकॉर्ड दिखाया है। शिकायत में पूछा गया है कि जब 81 प्रतिशत घरों में मवेशी ही नहीं पहुंचे, तो यह लाखों लीटर दूध किस डेयरी में बेचा गया मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मुख्यमंत्री और पशुसंवर्धन मंत्री से कठोर कार्रवाई की गुहार लगाई गई है।
वर्षवार लाभार्थी और वास्तविक स्थिति वर्ष लाभार्थी बिना जानवर वाले लाभार्थी
| वर्ष | कुल लाभार्थी | बिना जानवर वाले लाभार्थी |
|---|---|---|
| 2018–19 | 13 | 13 |
| 2019–20 | 11 | 8 |
| 2020–21 | 12 | 8 |
| 2021–22 | 17 | 12 |
| 2023–24 | 21 | 14 |
| 2024–25 | 12 | 9 |
| 2025–26 | 32 | 17 |
