प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया) 
भंडारा

भंडारा में खरीफ सीजन से पहले बीजों की मांग 45 हजार क्विंटल पार, बढ़ती कीमतों से किसान परेशान

Kharif Season Seed Demand: भंडारा जिले में खरीफ सीजन 2026 के लिए 45,055.12 क्विं. बीजों की मांग प्रस्तावित की गई है, जबकि बीजों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

केतकी मोडक

Farmer Concerns Fake Seeds In Bhandara: खरीफ सीजन 2026 के लिए जिले में 1 लाख 98 हजार 97 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध जिले में धान के साथ अरहर, सोयाबीन और कपास की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। किसान खेतों की तैयारी पूरी कर अब बीजों की व्यवस्था में जुट गए हैं। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में प्रमुख फसलों के लिए कुल 45,055.12 क्विंटल बीजों की मांग प्रस्तावित की गई है।

गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्ती

कृषि विभाग ने बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। वर्ष 2025-26 में निकृष्ट बीज और उर्वरकों के मामलों में तीन पुलिस मामले दर्ज किए गए तथा बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की गई। कई विक्रेताओं के लाइसेंस भी निलंबित या रद्द किए गए हैं। किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए जिला और तहसील स्तर पर शिकायत निवारण कक्ष स्थापित किए गए हैं। विभाग ने किसानों से किसी भी समस्या की जानकारी 9423028372 पर देने की अपील की है।

कृषि केंद्रों पर बढ़ी भीड़

उन्नत किस्मों के बीजों की मांग अधिक होने से कई कृषि केंद्रों पर पसंदीदा किस्में उपलब्ध नहीं हैं। बुवाई से पहले बीज खरीदने के लिए किसानों की भीड़ बढ़ रही है और बढ़ती लागत के कारण कर्ज का बोझ बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।

फसलवार बीजों की मांग

धान: 1,85,550 हे। क्षेत्र के लिए 44,532 क्विं. बीज अरहर: 9,470 हे। क्षेत्र के लिए 379 क्विं. बीज सोयाबीन: 470 हे। क्षेत्र के लिए 123 क्विं. बीज कपासः 960 है। क्षेत्र के लिए 21।12 क्विं. चीज

पक्का बिल लें

कृषि साहित्य एवं बीज विक्रेता संघ दर्शन उंबरे ने कहा कि "बीजों की कीमतें कंपनियों की नीति पर निर्भर करती हैं। किसानों को केवल अधिकृत विक्रेताओं से पक्का बिल लेकर ही बीज खरीदना चाहिए ताकि नकली बीजों की बिक्री पर रोक लगाई जा सके।"

किस कंपनी पर भरोसा करें

किसान राजेश सेलोकर ने कहा कि "बीजों की कीमतें हर साल बढ़ रही हैं। इस बार इतनी वृद्धि हुई है कि खेती से बचत की उम्मीद कम हो गई है। ऊपर से नकली बीजों का डर भी बना हुआ है, ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा कि किस कंपनी पर भरोसा करें।"

उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि विभाग की सलाह

कृषि विभाग ने धान उत्पादन बढ़ाने के लिए 100 प्रतिशत बीज उपचार के बाद ही नर्सरी तैयार करने, पारंपरिक पद्धति के स्थान पर 'श्री' एवं पट्टा पद्धति अपनाने तथा 2 से 20 जुलाई के बीच धान रोपाई पूरी करने की सलाह दी है। वहीं अरहर में टॉपिंग तकनीक और सोयाबीन में 6:1 अंतरवर्ती फसल प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है।

बीजों की बढ़ी कीमतों से किसान चिंतित

खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही बीजों की कीमतों में औसतन 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। महाबीज और निजी कंपनियों के माध्यम से बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ी कीमतों के साथ नकली बीजों के बाजार में आने की आशंका भी जताई जा रही है।

कपास, सोयाबीन और धान के बीज पिछले वर्ष की तुलना में महंगे हो गए हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ी लागत के कारण खेती का बजट बिगड़ गया है, जबकि अभी तक ऋण वितरण भी शुरू नहीं हुआ है।

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक क्या रहेगा बंद? स्कूल, दफ्तर से मेट्रो तक, जानें पूरा अपडेट

महाराष्ट्र के नांदेड़ में भीषण हादसा: तेज रफ्तार ट्रक और टाटा मैजिक की टक्कर, 9 लोगों की दर्दनाक मौत

बंगाल में सत्ता बदलते ही अडानी की एंट्री, जल्द शुरू होंगे ये 3 बड़े प्रोजेक्ट्स; जानें पूरी डिटेल

BRICS Summit: दिल्ली में ब्रिक्स का मंच तैयार, किस-किस देश के नेता होंगे शामिल; भारत के लिए क्या है खास?

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस: लालू, तेजस्वी और राबड़ी समेत 9 के खिलाफ आरोप तय, राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला