

Bhandara Heatwave 2026: भंडारा जिले में सूरज की तपिश अब जानलेवा साबित हो रही है। जिले का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने से न केवल इंसान, बल्कि बिजली की मशीनरी भी हांफने लगी है।
घरों में एसी और कूलर के बेतहाशा इस्तेमाल से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। इस भारी दबाव के कारण ट्रांसफार्मर और हाईवोल्टेज केबल्स को तकनीकी खराबी से बचाने के लिए महावितरण ने अब उन्हें कूलर लगाकर ठंडा रखने का सहारा लिया है।
भंडारा शहर की बिजली आपूर्ति के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले टाकली स्थित 33 केवी उपकेंद्र में बिजली प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। यहाँ 10 मेगावाट क्षमता के दो विशाल पावर ट्रांसफार्मर कार्यरत हैं। भीषण गर्मी और ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर के भीतर मौजूद कूलिंग ऑयल का तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
यदि यह तापमान 70 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर चला जाए, तो ट्रांसफार्मर फुंकने और पूरे भंडारा शहर की बत्ती गुल होने का खतरा रहता है। इससे निपटने के लिए महावितरण ने ट्रांसफार्मर के रेडिएटर के पास बड़े एयर कूलर तैनात किए हैं, ताकि मशीनरी का तापमान स्थिर रहे और ऑयल ठंडा बना रहे।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड आने से फ्यूज उड़ने और जंपर जलने की शिकायतें बारबार आ रही हैं। महावितरण की 24 घंटे सेवाइस संकट के बीच महावितरण के कर्मचारी और लाइनमैन किसी वॉरियर की तरह काम कर रहे हैं।
44 डिग्री की तपती दोपहर में भी कर्मचारी खंभों और फीडरों पर चढ़कर मरम्मत कार्य कर रहे हैं ताकि नागरिकों को निर्बाध बिजली मिल सके। महावितरण के सहायक अभियंताओं ने बताया कि उनका लक्ष्य नागरिकों को 24 घंटे बिजली सेवा देना है और तकनीकी खराबी को कम करने के लिए वे एयर कूलिंग सिस्टम जैसे हर संभव प्रयास कर रहे हैं। जहाँ एक ओर नागरिक सौर ऊर्जा का लाभ ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए महावितरण को गर्मियों में भारी कसरत करनी पड़ रही है।