भंडारा में किसानों का एल्गार: धान की लिमिट नहीं बढ़ी तो ठप होगा जिला, सरकार को दी सीधी चेतावनी!

Bhandara Farmers Protest: भंडारा में धान की लिमिट बढ़ाने के लिए किसानों का विशाल एल्गार मोर्चा। 25-30 लाख क्विंटल धान केंद्रों पर फंसा, सरकार को उग्र आंदोलन की चेतावनी।
Farmers in Bhandara launch a massive 'Elgar Morcha' demanding an increase in paddy purchase limits for the 2025-26 season. Protesters warn of intense agitation.
भंडारा में किसानों का मोर्चा (सौजन्य-नवभारत)
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Bhandara Dhan Kharedi Maharashtra: भंडारा जिले में धान उत्पादक किसानों का सब्र अब जवाब दे गया है। खरीफ सीजन 2025-26 के लिए धान खरीदी पर लगाई गई सीमित मर्यादा (लिमिट) को तत्काल बढ़ाने की मांग को लेकर किसान संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर विशाल एल्गार मोर्चा निकाला।

आंदोलन के जरिए किसानों ने शासन की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरते हुए स्पष्ट रूप से चेतावनी दे डाली कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो आने वाले समय में जिले में उग्र जन-आंदोलन होगा और इसकी जिम्मेवारी सरकार की होगी। आंदोलन की शुरुआत शहर के व्यस्त बस स्टैंड परिसर से हुई। यहां बड़ी संख्या में किसान एकजुट हुए और नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय की ओर आगे बढ़े।

धान खरीदी पर उठे सवाल

मोर्चे का नेतृत्व वरिष्ठ नेता माधवराव बांते, राजेश हटवार, शिवकुमार गणवीर, हिवराज उके, अशोक शरणागत, पवन मस्के, राकेश कारेमोरे, शीलवंत मेश्राम और चंद्रशेखर हटवार ने किया। किसानों के समर्थन के लिए सांसद डॉ. प्रशांत पडोले भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। महाराष्ट्र राज्य किसान सभा और धान खरीदी केंद्र संचालकों के सहयोग से आयोजित इस मोर्चे में सरकार की धान खरीदी नीति पर तीखे सवाल उठाए गए।

वर्तमान में जिले का लगभग 25 से 30 लाख क्विंटल धान बिना बिके खरीदी केंद्रों पर पिछले दो माह से पड़ा है। लिमिट कम होने के कारण किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। उन्हें अपना पसीने से सींचा हुआ धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के बजाय मजबूरन निजी व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है।

Bhandara में आंदोलन को उग्र करने की धमकी

मोर्चे के समापन पर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्य रूप से चार मांगें रखी गई हैं: इसमें मुख्य रूप से धान खरीदी की लिमिट तुरंत बढ़ाना, किसानों को 25 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना, केंद्रों से धान उठाने की प्रक्रिया में तेजी लाना और बोनस की घोषणा करना शामिल है। किसान संगठनों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो किसान चुप नहीं बैठेंगे और प्रशासन को उग्र विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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