मदद का विश्वास नहीं दिला पाए पालकमंत्री, सुखा निरिक्षण के दौरान अपनी कैफियत रखने वाले किसान ने की खुदखुशी

Mohadi Farmer Suicide: भंडारा के मोहाड़ी तहसील में धान की फसल बर्बाद होने से परेशान किसान राजेंद्र सपाटे की मौत हो गई। पांच दिन पहले उन्होंने पालकमंत्री से राहत मांगी थी।
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पंकज भोयर-भंडारा किसान(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Farmer Death: सूखे की मार और धान की फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट में घिरे मोहाड़ी तहसील के धोप गांव निवासी किसान राजेंद्र अमर सपाटे (55) ने सुबह करीब 5 बजे निजी कुएं में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। उनकी साढ़े चार एकड़ जमीन में पानी के अभाव में धान की फसल सूख गई थी। घटना से गांव में शोक की लहर फैल गई।

फसल बर्बाद होने से बढ़ी परेशानी

राजेंद्र सपाटे ने इस वर्ष साढ़े चार एकड़ में धान की फसल लगाई थी। बारिश की कमी और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल सूख गई। खेती की तैयारी, मजदूरी, खाद और अन्य कृषि सामग्री पर खर्च के बावजूद उत्पादन की उम्मीद खत्म हो गई थी। खेती की आय प्रभावित होने से परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो गया था। परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं।

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किसान राजेंद्र सपाटे (सोर्सः सोशल मीडिया)

जनप्रतिनिधि व तहसीलदार ने किया घटनास्थल का दौरा

घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व सांसद मधुकर कुकड़े, पूर्व विधायक चरण वाघमारे, अपर जिलाधिकारी राजेंद्र जाधव तथा मोहाड़ी की तहसीलदार प्राजक्ता बुरांडे ने घटनास्थल का दौरा किया, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पीड़ित परिवार को तत्काल सरकारी सहायता देने की मांग की।

साथ ही घोप परिसर को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने सपाटे की साढ़े चार एकड़ जमीन में हुए फसल नुकसान का वस्तुनिष्ठ सर्वेक्षण करने, उनके ज्ञापन पर हुई कार्रवाई की जानकारी देने और पात्रता के अनुसार परिवार को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इस घटना ने सूखे की वास्तविक स्थिति, फसल नुकसान के आकलन और संकटग्रस्त किसानों तक समय पर राहत पहुंचाने की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है।

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सपाटे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

उल्लेखनीय है कि 3 अक्टूबर को पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर सूखे की स्थिति का जायजा लेने धोप पहुंचे थे। इस दौरान सपाटे ने उन्हें फसल सूखने और आर्थिक संकट की जानकारी देते हुए ज्ञापन सौंपकर राहत की मांग की थी।

5 दिन पहले पालकमंत्री से मांगी थी राहत

इसके महज पांच दिन बाद हुई उनकी मौत से किसानों को समय पर सहायता मिलने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही आंधलगांव पुलिस ने पंचनामा कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस निरीक्षक नितिन राठौड़ के मार्गदर्शन में जांच जारी है। सपाटे परिवार के मुखिया की मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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