

Highlights:
जिलाधिकारी सावन कुमार ने किसानों को आगामी रबी और ग्रीष्मकालीन सीजन में कम पानी वाली फसलें उगाने की सलाह दी है।
जलसंकट को देखते हुए सरसों, चना, मसूर और अलसी जैसी फसलों की खेती करने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछले सीजन में कृषि विभाग ने 2,215 किसानों को प्रति किसान एक एकड़ के लिए सरसों के बीज वितरित किए थे।
Bhandara Water Crisis: भंडारा जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए आगामी रबी और ग्रीष्मकालीन सीजन में पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल नियोजन करना आवश्यक है। किसान धान की खेती के पीछे न भागते हुए कम पानी में तैयार होने वाली सरसों, चना, मसूर और अलसी जैसी फसलों को प्राथमिकता दें। यह निर्देश जिलाधिकारी सावन कुमार ने दिए। बैठक में निवासी उपजिलाधिकारी मनोहर चव्हाण, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी अभिषेक नामदास, जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अधिकारी हितेश खोब्रागडे, कृषि अधिकारी तथा जिले के सभी तहसीलदार उपस्थित थे।
जिले में संभावित जलसंकट, चारे की कमी और कृषि कार्यों के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता की समीक्षा के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने जलसंकट के दौरान किए जाने वाले उपायों और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। अगस्त से सितंबर के दौरान कम बारिश होने के कारण धान की फसल के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। बारिश की कमी और उपलब्ध जलस्रोतों की स्थिति को देखते हुए किसानों को फसल पद्धति में बदलाव करने की आवश्यकता जताई गई।
कृषि विभाग की ओर से कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पिछले सीजन में 2,215 किसानों को प्रति किसान एक एकड़ के हिसाब से कुल 2,215 क्विंटल सरसों के बीज वितरित किए गए थे। इसके अलावा चना, मसूर और सरसों के बीज भी उपलब्ध कराए गए हैं। कुछ मात्रा में ज्वार के बीजों का भी वितरण किया गया है।
जलसंकट के दौरान नागरिकों और किसानों को आवश्यक पानी उपलब्ध कराने के लिए विशेष नल मरम्मत कार्य तथा नए कुओं के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा विशेष मरम्मत कार्य और पूरक नल जलापूर्ति योजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करते हुए जलसंकट निवारण के उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। किसानों की समस्याओं की समीक्षा कर अनुदान और अन्य योजनाओं के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने तथा तहसील स्तरीय समितियों को इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि किसान आगामी सीजन की तैयारी अभी से शुरू करें। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है, वहां उसका किफायत से उपयोग किया जाए। वहीं, सिंचाई की सुविधा से वंचित किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए मार्गदर्शन दिया जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पानी की उपलब्धता और जल संरक्षण की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।
जलसंकट प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की सिंचाई के लिए नियमावली तैयार कर पानी का नियोजनबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए। तहसीलदार और ग्रामसेवक गांवों में जाकर किसानों के साथ बैठकें करें तथा उन्हें जलसंकट की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए आगामी फसल सीजन के लिए उचित नियोजन का मार्गदर्शन दे।