

Jalsamadhi Protest In Bhandara: भंडारा जिले के गर्रा-बघेड़ा गांव में स्थित बावनथड़ी सिंचाई परियोजना प्रभावितों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सोमवार को पुराने सुसुरडोह (बीड़ टोला) में एक दिवसीय जलसमाधि आंदोलन किया गया। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में परियोजना प्रभावित महिला और पुरुष बावनथड़ी के पानी में उतर गए और शासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए आंदोलन पर डटे रहे।
आंदोलन की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए उपविभागीय अधिकारी गणेश दिघे तथा तहसीलदार उपेश अंबादे खुद पानी में उतरकर आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों ने पानी के भीतर ही प्रभावित ग्रामीणों की सभी समस्याओं को विस्तार से सुना। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाकर जल्द से जल्द उचित और सकारात्मक कार्रवाई कराई जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों से मिले इस ठोस आश्वासन के बाद प्रभावितों ने अपना जलसमाधि आंदोलन शांतिपूर्वक समाप्त कर दिया। सुसुरडोह-सीतेकसा में सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ पूर्ण एवं समयबद्ध पुनर्वास किया जाए। परियोजना के लिए अधिगृहीत की गई कृषि भूमि, मकानों और अन्य संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार तत्काल मुआवजा दिया जाए। प्रभावित परिवार के शिक्षित और योग्य युवाओं को इस परियोजना एवं अन्य शासकीय योजनाओं के तहत रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।
पुनर्वासित किए गए नए गांवों में पक्की सड़क, शुद्ध पेयजल, सुचारू बिजली, स्वास्थ्य केंद्र और विद्यालय जैसी बुनियादी सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं। इस दौरान समिति के उपाध्यक्ष भीमराव नैताम, पूर्व भंडारा जिला परिषद सदस्य अशोक उइके, लक्ष्मीकांत सलामे, प्रभाताई पेंदाम सहित समिति के पदाधिकारी, सदस्य और सैकड़ों की तादाद में परियोजना प्रभावित ग्रामीण उपस्थित थे। अधिकारियों के इस संवेदनशील रवैये से अब ग्रामीणों में अपनी मांगें पूरी होने की उम्मीद जगी है।
आंदोलन के दौरान क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा, मौके पर गोबरवाही थाना प्रभारी शरद शेवाले, आंधलगांव थाना प्रभारी नितिन राठौड़, सिहोरा थाना प्रभारी विजय कसौधन और तुमसर थाना प्रभारी शिवम विसापुरे सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की सतर्कता और प्रशासनिक सूझबूझ से यह बड़ा आंदोलन बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया। इस जलसमाधि आंदोलन का नेतृत्व पुनर्वास समिति के अध्यक्ष किशोर उड़के ने किया।