छत्रपति संभाजीनगर में खरीफ बैठक के दौरान तीखी बहस: मक्का खरीद को लेकर पालकमंत्री और कांग्रेस सांसद भिड़े

Sambhajinagar Kharif Review Meeting: छत्रपति संभाजीनगर में खरीफ समीक्षा बैठक के दौरान मक्का खरीद के मुद्दे पर पालकमंत्री संजय शिरसाट और कांग्रेस सांसद डॉ. कल्याण काले के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
A heated argument broke out between Guardian Minister Sanjay Shirsat and Congress MP Dr। Kalyan Kale over maize procurement prices during a Kharif review meeting।
Sanjay Shirsat , Kharif (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Kharif Review Meeting Sanjay Shirsat Palakmantri: छत्रपति संभाजीनगर जिला नियोजन समिति सभागार में शुक्रवार को आयोजित खरीफ सीजन पूर्व समीक्षा बैठक के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब पालकमंत्री संजय शिरसाट और कांग्रेस सांसद डॉ. कल्याण काले के बीच मक्का खरीद और किसानों के मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई। दोनों नेताओं के बीच हुई नोकझोंक से कुछ समय के लिए सभागार में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। बाद में अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। बैठक की अध्यक्षता पालकमंत्री संजय शिरसाट ने की।

इस दौरान राज्य के ओबीसी विकास मंत्री अतुल सावे, सांसद डॉ. कल्याण काले, जिला परिषद अध्यक्ष अविनाश गलांडे पाटील, विधायक अंबादास दानवे, मनपा आयुक्त अमोल येडगे, जिलाधिकारी विनय गौडा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा के बाद मक्का खरीद का मुद्दा सामने आया। सांसद डॉ. कल्याण काले ने किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिलने का प्रश्न उठाया।

मक्का खरीद और किसानों के मुद्दों पर बढ़ रहा विवाद

व्यापारी किसानों से मात्र 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद कर रहे हैं। इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए तथा छत्रपति संभाजीनगर  जिले का खरीद कोटा बढ़ाया जाना चाहिए। इसी दौरान पालकमंत्री संजय शिरसाट ने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी एक विषय पर घंटों चर्चा नहीं की जा सकती और संबंधित विषय पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। इस पर सांसद काले ने कहा कि वह किसानों के हित का मुद्दा उठा रहे हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।

डॉ. काले ने बैठक जल्द निपटाने का लगाया आरोप

बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए सांसद काले ने आरोप लगाया कि खरीफ समीक्षा बैठक को जल्दबाजी में समाप्त किया गया, जिससे किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को न्याय देना है तो ऐसी बैठकों के लिए अलग से पर्याप्त समय निर्धारित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जिले के किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का का उत्पादन किया है। मक्का का दाम 2400 प्रति क्विंटल है, परंतु, सरकार द्वारा मका 1200 रुपए प्रति क्विंटल खरीदी जा रही है।

बैठक में बैठने के बयान को लेकर भी हुई कहासुनी

बहस बढ़ने पर पालकमंत्री शिरसाट ने कहा कि भविष्य में यह भी विचार करना पड़ेगा कि बैठक में किसे बैठने दिया जाए और किसे नहीं। इस बयान पर सांसद काले और अधिक आक्रामक हो गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें जिले की 20 लाख जनता ने चुनकर संसद में भेजा है और वह जिले के प्रतिनिधि के रूप में किसी भी शासकीय बैठक में शामिल हो सकते हैं। उन्हें बैठक में बैठने की अनुमति कौन देगा या रोकेगा, इसका निर्णय कोई मंत्री नहीं कर सकता।

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