

Sambhajinagar Audit Objections: छत्रपति संभाजीनगर मनपा के विभिन्न विभागों के कार्यों पर हर वर्ष किए जाने वाले लेखा परीक्षण में सामने आई त्रुटियों के निपटारे की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। मार्च 2025 तक मनपा के ऑडिट से संबंधित कुल 930 आपत्तियां अब भी लंबित हैं, जिनसे जुड़ी 5,552 करोड़ 57 लाख रुपये की राशि विभिन्न स्तरों पर अटकी हुई है। इनमें से कई मामलों का निस्तारण पिछले एक दशक से नहीं हो सका है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षण विभाग ने वर्ष 2011-12 से 2015-16 के बीच वित्तीय लेन-देन का ऑडिट किया था।
इसके बाद भी विभिन्न विभागों के कार्यों की जांच जारी रही। हालांकि, ऑडिट के दौरान दर्ज की गई अनेक टिप्पणियों व आपत्तियों पर संबंधित विभागों ने आवश्यक दस्तावेज एवं स्पष्टीकरण समय पर प्रस्तुत नहीं किए, जिस से वे आज भी लंबित हैं। इनमें आपत्तिजनक व्यय, वसूली योग्य बकाया राशि, अस्थायी रूप से अमान्य घोषित रकम तथा विभिन्न कारणों से अटकी हुई निधियां शामिल हैं। कुल राशि 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक होने के कारण छत्रपति संभाजीनगर मनपा की वित्तीय अनुशासन व कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
प्रलंबित 930 आपत्तियों में 1,588 करोड़ 96 लाख रुपये की आपत्तिजनक राशि, 376 करोड़ 1 लाख रुपये की वसूली योग्य राशि, 776 करोड़ 33 लाख रुपये की अस्थायी रूप से अमान्य टिप्पणियों से जुड़ी राशि तथा 2,810 करोड़ 77 लाख रुपये विभिन्न कारणों से अटकी हुई निधि के रूप में शामिल हैं। अंतिम रूप से तय किए गए मामलों में भी 50 लाख रुपये की बकाया राशि अब तक वसूल नहीं हो सकी है।
मनपा आयुक्त अमोल येड़गे ने बताया कि लंबित ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी। जिन मामलों में वसूली आवश्यक है, वहां संबंधित पक्षों से राशि वसूल की जाएगी। साथ ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर लंबित ऑडिट टिप्पणियों को जल्द से जल्द समाप्त करने के निर्देश विभागों को दिए जाएंगे।