HPCL kerosene Distribution: छत्रपति संभाजीनगर में 8 साल के वनवास के बाद राशन दुकानों पर केरोसीन की दस्तक!

Chhatrapati Sambhajinagar Kerosene distribution: छत्रपति संभाजीनगर में 2016 के बाद फिर मिलेगा मिट्टी का तेल, राशन दुकानदारों की चांदी, सरकार ने बढ़ाया कमीशन। क्या यह 'ईंधन' है या पुरानी यादों का तेल?
HPCL Kerosene Distribution: Kerosene makes a comeback at ration shops in Chhatrapati Sambhajinagar after an eight-year hiatus!
राशन की दुकानोें में केरोसीन (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Kerosene Distribution In Ration Shops: फिल्मों में तो आपने सुना ही होगा पुरानी यादें कभी पीछा नहीं छोड़तीं। कुछ ऐसा ही हुआ है छत्रपति संभाजीनगर के राशन कार्ड धारकों के साथ। साल 2016 में जब केरोसीन (मिट्टी के तेल) को राशन दुकानों से 'तलाक' दिया गया था, तो लगा था कि अब गैस सिलेंडर के युग में इसकी कभी वापसी नहीं होगी। लेकिन, ईंधन की कमी क्या हुई, सरकार को फिर से उसी पुराने वफादार दोस्त की याद आ गई।

छत्रपति संभाजीनगर के जिला आपूर्ति अधिकारी प्रवीण फुलारी ने घोषणा की है कि HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम) अब केरोसीन का नया 'दूल्हा' होगा। पुणे के लोणी कालभोर डिपो से मिट्टी का तेल सज-धजकर टैंकरों में आएगा। अब यहाँ एक ट्विस्ट है कीमत 'दूरी' पर निर्भर करेगी। यानी, आपकी राशन दुकान डिपो से जितनी दूर होगी, आपकी जेब पर उतना ही बड़ा छेद होगा। मतलब डिपो से राशन की दुकानों तक की दूरी व परिवहन खर्च के आधार पर कीमत तय होगी।

दुकानदारों का ‘हृदय परिवर्तन’ और डबल कमीशन

2016 के बाद, केरोसीन के लाइसेंस धारकों ने सोचा था कि यह तेल अब केवल आग लगाने के काम आएगा, इसलिए उन्होंने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। जब सरकार ने दोबारा वितरण की बात की, तो दुकानदार बोले "अरे भाई, अब कौन पुराने झंझट में फंसे?" दुकानदारों की अनिच्छा को देखते हुए सरकार ने कमीशन को सीधा डबल कर दिया। अब उन्हें प्रति किलोलीटर 675 रुपये की जगह 1350 रुपये मिलेंगे। कमीशन बढ़ते ही दुकानदारों का 'अनिच्छा' वाला दर्द अचानक गायब हो गया।

कोटा मिला है, पर संभलकर!

केंद्र सरकार ने राज्य को 3744 किलोलीटर का कोटा दिया है, जिसमें से हमारे जिले के हिस्से में 1 लाख 44 हजार लीटर आया है। यह वितरण केवल मार्च और अप्रैल की सीमित अवधि के लिए है। व्यंग्य यह है कि जहाँ दुनिया इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर एनर्जी की बात कर रही है, हम वापस 'चिमनी' और 'स्टोव' वाले स्वर्ण युग की ओर लौट रहे हैं।

अगर आपके घर का गैस सिलेंडर खत्म हो जाए और डिलीवरी वाला न आए, तो घबराइए मत। अपनी पुरानी स्टोव झाड़-पोछकर निकाल लीजिए, क्योंकि सरकार आपको फिर से 'पुराने दिनों' का अहसास कराने के लिए तैयार है। बस दुआ कीजिए कि पुणे से आपके घर तक की दूरी इतनी न हो कि मिट्टी का तेल, पेट्रोल के भाव मिलने लगे!

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