Sambhajinagar: करमाड़ ऑनलाइन गेम ठगी का मास्टरमाइंड साहिल कुरैशी फरार, पुलिस ने तेज की तलाश

Sambhajinagar: करमाड़ ऑनलाइन गेम ठगी मामले में मास्टरमाइंड साहिल कुरैशी अब भी फरार है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में टीमें भेजकर जांच तेज की है। मामले में 20 नए बैंक खाते और स्कैनर बरामद हुए।
छत्रपति संभाजी नगर
छत्रपति संभाजी नगर (सौ. सोशल मीडिया )
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Chhatrapati Sambhajinagar News: तहसील के करमाड़ में ऑनलाइन गेम के नाम पर नागरिकों से बड़े पैमाने पर ठगी करने के प्रकरण में अंतरराष्ट्रीय जुए के रैकेट का मुख्य सरगना साहिल कुरैशी अब भी फरार है।

उसकी तलाश के लिए स्थानीय अपराध शाखा ने अतिरिक्त टीमें छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों में भेजी हैं। प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों की पुलिस हिरासत 25 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी उपाध्ये ने शनिवार, 22 नवंबर को दिया।

हत्थे चढ़े आरोपियों में विशमकुमार, शादाब खान, महेंद्र नवग्रह, प्रतीक मोरे व सौरभ महाले हैं। छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी मुख्य आरोपी साहिल की तलाश तेज करते हुए पुलिस की तीन से चार विशेष टीमें रवाना हो चुकी हैं। 2 टीमें नागपुर में उसकी सरगर्मी से खोजबीन कर रही थीं, पर सफलता नहीं मिली।

टीम अभी भी छत्तीसगढ़ में है व 1 नई टीम भी शनिवार को छत्तीसगढ़ भेजी गई। तफ्तीश में पुलिस को 20 नए बैंक खाते मिले हैं, जिनका उपयोग ठगी में किया गया था। इनमें कुछ खाते छत्रपति संभाजीनगर के हैं, जबकि बाकी अन्य राज्यों के।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से फोनपे व गूगल पे के स्कैनर भी जब्त किए गए हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि ये स्कैनर किस बैंक खाते से जुड़े थे व इनसे कितना लेन-देन हुआ। जांच के दौरान प्रकरण में दो नए धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस ने इस रैकेट में इंटरनेशनल कॉल्स किए जाने के प्रमाण मिलने की पुष्टि की है।

रैकेट का असली सरगना साहिल कुरैशी

जांच अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट के पीछे का असली मास्टरमाइंड साहिल कुरैशी है व उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पूरे ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।

20 नए बैंक खाते मिले, स्कैनर भी जब्त

जब्त मोबाइल व कंप्यूटर से महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिलने की उम्मीद पुलिस की है। पुलिस विशेष बिंदुओं पर जांच कर रही है जिसमें ऑनलाइन गेमिंग के जरिए कितने लेन-देन किए गए व उसका पैटर्न क्या था? कौन से ऐप वा वॉलेट का प्रयोग हुआ?

समझा जाता है कि इससे रैकेट की वित्तीय व तकनीकी संरचना स्पष्ट होगी। पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपियों ने किन-किन खातों में लेन-देन किया। क्या इसमें मनी लॉनडंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं? इस अपराध से जुड़े फंड की आवाजाही किन चैनलों से हुई आदि।

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