मराठवाड़ा में बाढ़ से गन्ने की फसल बर्बाद, शक्कर उत्पादन में 20-30 लाख टन की कमी का खतरा

Chhatrapati Sambhaji Nagar News: मराठवाड़ा में अतिवृष्टि से गन्ने का 30% क्षेत्र पानी में डूब गया है, जिससे शक्कर उत्पादन में 20-30 लाख टन की कमी होने की संभावना है। इससे किसानों की आय पर असर पड़ेगा।
मराठवाड़ा में गन्ने की फसल बर्बाद (pic credit; social media)
मराठवाड़ा में गन्ने की फसल बर्बाद (pic credit; social media)
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Floods in Marathwada: मराठवाड़ा के किसानों के लिए यह वर्ष फिर से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। सूखे से जूझ रहे क्षेत्र में गन्ने की ओर किसानों ने रुख किया था, लेकिन 2025 के मानसून में औसत से अधिक बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है।

कई जिलों में सैकड़ों हेक्टेयर गन्ना पानी में डूब गया है। गत वर्ष 2023-24 में मराठवाड़ा में 278 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी, जबकि इस बार 20 से 30 लाख टन की कमी की संभावना जताई जा रही है।

मराठवाड़ा का गन्ना उत्पादन देश में महाराष्ट्र के दूसरे स्थान का हिस्सा है। 2023-24 के पेराई सत्र में राज्य में कुल 1073.08 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी, जिसमें मराठवाड़ा का हिस्सा 25.8 प्रतिशत था। संभाग का पेराई क्षेत्र 3.91 लाख हेक्टेयर है।

पिछले सत्र में यहां की 47 चीनी मिलों (23 सहकारी, 24 निजी) ने पेराई की और 11.01 लाख क्विंटल शक्कर का उत्पादन हुआ। किसानों को प्रति टन 3,000-3,500 रुपए मिलने के कारण यह आर्थिक रूप से लाभदायक रहा।

लेकिन इस वर्ष अतिवृष्टि के चलते संभाग का लगभग 30% क्षेत्र प्रभावित हुआ है, यानी 1.17 लाख हेक्टेयर गन्ने की फसल पानी में डूब चुकी है। इसके परिणामस्वरूप न केवल गन्ने की मात्रा घटेगी बल्कि शक्कर की गुणवत्ता और उत्पादन भी प्रभावित होगा। खेतों में 5 से 8 दिनों तक जलजमाव होने के कारण न्यूनतम उत्पादन में 7 से 10 प्रतिशत की कटौती का अनुमान है।

किसानों का कहना है कि गोदावरी नदीकाठा और गंगथड़ी क्षेत्रों में बाढ़ के कारण फसल व्यापक नुकसान झेल रही है। खेती पर पानी का अत्यधिक प्रभाव पड़ा है, जिससे कई किसानों की आय पर भी असर पड़ेगा। विभागीय सह संचालक (शक्कर) सचिन रावल के अनुसार, मराठवाड़ा की औसत उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 71 टन है, जो राज्य की औसत 74.88 टन/हेक्टेयर से कम है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को तुरंत राहत और वित्तीय मदद की आवश्यकता है, ताकि गन्ना उत्पादक प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का सामना कर सकें। शक्कर उत्पादन में कमी का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी पड़ेगा क्योंकि 40 लाख किसानों और श्रमिकों की रोजमर्रा की आय गन्ने पर निर्भर है।