घृष्णेश्वर में भक्ति का महाकुंभ: हरिद्वार के गंगाजल से होगा शिव का अभिषेक, 5 जून से शुरू होगा अतिरुद्र महायज्ञ

Ghrishneshwar Temple Darshan Timing: घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग में 5-9 जून तक अतिरुद्र महायज्ञ। हरिद्वार के गंगाजल से होगा अभिषेक, 400 वैदिक विद्वान करेंगे मंत्रोच्चार। जानें दर्शन के लिए नई गाइडलाइंस।
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (सोर्स: फाइल फोटो)
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Ghrishneshwar Jyotirlinga Atirudra Mahayagya: विश्व शांति, मानव कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि और सुख-शांति की कामना के साथ एलोरा स्थित पवित्र घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 5 जून से 9 जून तक पांच दिवसीय भव्य अतिरुद्र महायज्ञ एवं अतिरुद्र अभिषेक का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान मंदिर परिसर में 24 घंटे वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्रपाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। विशेष आयोजन के कारण पांच दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश बंद रहेगा और भक्त केवल भगवान घृष्णेश्वर के मुखदर्शन कर सकेंगे।

हरिद्वार से पहुंचा पवित्र गंगाजल

इस वर्ष के अतिरुद्र अभिषेक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान घृष्णेश्वर का अभिषेक हरिद्वार से लाए गए पवित्र गंगाजल से किया जाएगा। गंगाजल लेकर आए टैंकर का मंदिर परिसर में विधिवत पूजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने जय भोले के जयघोष के साथ टैंकर का स्वागत किया। आयोजन समिति के अनुसार पांच दिनों तक लगातार इसी गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा।

देशभर से आएंगे 400 वैदिक विद्वान

अतिरुद्र महायज्ञ में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 400 वैदिक ब्राह्मण, वेदपाठी और धर्माचार्य भाग लेंगे। पांच दिनों तक चौबीसों घंटे वैदिक मंत्रों का उच्चारण, रुद्रपाठ और विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके अलावा धार्मिक प्रवचन, भजन, कीर्तन तथा अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

चार दशक पुरानी है परंपरा

आयोजन समिति के अध्यक्ष सुमित बाबरेकर ने बताया कि अधिक मास के अवसर पर विश्व शांति के लिए यह विशेष अनुष्ठान वर्ष 1985 से आयोजित किया जा रहा है। प्रत्येक तीन वर्ष में होने वाला यह धार्मिक आयोजन इस बार अपनी श्रृंखला का 16वां आयोजन होगा। पिछले लगभग चार दशकों से यह परंपरा निरंतर जारी है और देशभर के श्रद्धालु इसमें सहभागी बनते हैं।

अलग-अलग पवित्र द्रव्यों से होता रहा है अभिषेक

समिति के अनुसार वर्ष 1985 में जल, 1988 में दूध, 1991 में गन्ने के रस, 1993 में शुद्ध घी, 1996 में शहद, 1999 में दही, 2001 में त्रिवेणी संगम जल, 2004 में पुष्कर तीर्थ जल, 2007 में नारियल जल, 2010 में आमरस, 2012 में ब्रह्मसरोवर जल, 2015 में शिवालय तीर्थ जल, 2018 में दर्भ जल तथा 2023 में एलगंगा नदी के जल से भगवान घृष्णेश्वर का अभिषेक किया गया था। इस वर्ष हरिद्वार से लाए गए पवित्र गंगाजल से विशेष अभिषेक किया जाएगा।

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से दर्शन व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि अतिरुद्र महायज्ञ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में प्रवेश बंद रखने का निर्णय लिया गया है। श्रद्धालु मंदिर परिसर से भगवान के दर्शन कर सकेंगे और इस पुण्य अवसर का लाभ उठा सकेंगे।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

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