

Chhatrapati Sambhajinagar Waluj MIDC FDA Raid: छत्रपति संभाजीनगर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने वालूज एमआईडीसी क्षेत्र में स्थित एक औद्योगिक इकाई पर छापेमारी कर 36 लाख रुपये से अधिक मूल्य के पेय पदार्थों का स्टॉक जब्त किया है। जांच के दौरान उत्पाद की लेबलिंग में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद खाद्य उत्पाद निर्माण क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की सख्ती स्पष्ट दिखाई दे रही है।
एफडीए की टीम ने मंगलवार को वालूज एमआईडीसी स्थित एफडीसी लिमिटेड की इकाई का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ‘आरटीएस फ्रूट बेवरेज एनर्जी एंड इलेक्ट्रोलाइट (एर्नजल)’ नामक उत्पाद के स्टॉक की विस्तृत जांच की गई। अधिकारियों ने पाया कि उत्पाद की पैकेजिंग और लेबल पर दी गई जानकारी खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी। प्राथमिक जांच में लेबलिंग संबंधी कई तकनीकी खामियां सामने आने के बाद अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया।
एफडीए अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कुल 84,992 बोतलों का स्टॉक पाया गया। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर पूरे स्टॉक को सील कर जब्त कर लिया गया। जब्त किए गए माल की अनुमानित कीमत 36 लाख 172 रुपये आंकी गई है। अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित इकाई के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे के पदभार संभालने के बाद राज्यभर में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, खाद्य उत्पाद निर्माताओं और वितरण केंद्रों का निरीक्षण किया जा रहा है।
प्रशासन का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य उत्पाद पहुंचाना है। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी इकाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह कार्रवाई सहायक आयुक्त डी.वी. पाटील और सहआयुक्त एस.आर. करकले के मार्गदर्शन में की गई। छापेमारी और जांच की प्रक्रिया खाद्य सुरक्षा अधिकारी पी.एस. कुचेकर और पी.पी. सुरसे ने पूरी की।
एफडीए ने खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माताओं को निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों का कड़ाई से पालन करने की चेतावनी दी है, ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।