चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन में बदलाव की तैयारी तेज, AIMIM की बढ़ती ताकत के बीच कांग्रेस अध्यक्ष पद पर मंथन

Sambhajinagar Congress City President: संभाजीनगर कांग्रेस शहर अध्यक्ष पद पर फैसला अब तक लंबित है। रिपोर्ट दिल्ली भेजे जाने के बावजूद घोषणा नहीं होने से दावेदारों और कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ी है।
Preparations for organizational changes within the Congress intensify ahead of elections; deliberations over the Congress President's post amidst the rising influence of the AIMIM.
कांग्रेस संगठन, एमआईएम प्रभाव,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sambhajinagar City President Race: छत्रपति संभाजीनगर कांग्रेस के शहर अध्यक्ष पद को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। पार्टी के केंद्रीय सचिव व पर्यवेक्षक शहर में आकर संभावित उम्मीदवारों से चर्चा कर चुके हैं। इसके बाद तैयार की गई रिपोर्ट दिल्ली स्थित पार्टी नेतृत्व को सौंप दी गई है। हालांकि दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई घोषणा नहीं होने से दावेदारों व कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ गई है।

पूर्व विधायक विवेक बंसल ने शहर में विभिन्न पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस को मजबूत करने की तैयारी कर रही है व इसी के तहत शहर नेतृत्व में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

कांग्रेस सांसद डॉ कल्याण काले ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व जल्द ही अंतिम निर्णय लेगा। शहर की राजनीति में एमआईएम की बढ़ती ताकत को भी कांग्रेस गंभीरता से देख रही है। मनपा में एमआईएम के 33 नगरसेवक चुने जाने के बाद शहर की राजनीति में उसका प्रभाव बढ़ा है।

पार्टी का एक नगरसेवक निर्वाचित

कभी मुस्लिम मतदाताओं पर मजबूत पकड़ रखने वाली कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों में अपना पारंपरिक आधार खोती नजर आई है। एमआईएम के प्रभाव के कारण कांग्रेस का केवल एक नगरसेवक निर्वाचित हुआ व बाद में वह भी दूसरे गुट के साथ चला गया।

ऐसे में संगठन को मजबूत करने व अल्पसंख्यक मतदाताओं को फिर से जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी नए शहर अध्यक्ष पर रहने वाली है।

एक गुट की मांग है कि ऐसा शहर अध्यक्ष बनाया जाए जो एमआईएम को सीधी चुनौती दे सके, जबकि दूसरा गुट हिंदू चेहरे को अध्यक्ष बनाने के पक्ष में बताया जा रहा है।

इसी कारण इस पद को लेकर पार्टी में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। कई दावेदार शीर्ष नेतृत्व तक अपनी पहुंच मजबूत करने में जुटे हुए हैं। अब पार्टी नेतृत्व किस पर भरोसा जताता है, इस पर नजरें टिकी हैं।

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