छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद: 5 घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद 83 सदस्यों का निर्विरोध चयन

Chhatrapati Sambhajinagar ZP Committee Selection: छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद में विषय समितियों के चयन के दौरान भारी हंगामा हुआ। मान-मनोव्वल के बाद 83 सदस्यों को चुना गया और विभागों का आवंटन हुआ।
Chhatrapati Sambhajinagar Zilla Parishad: 83 Members Elected Unanimously After 5 Hours of High-Voltage Drama
छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद (सार्स: सोशल मीडिया)
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ZP Committee Selection: छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद, जिसे जिले का 'मिनी मंत्रालय' कहा जाता है, में करीब 6 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सामान्य सभा और विषय समितियों के चयन की प्रक्रिया संपन्न हुई। मराठवाड़ा राजस्व शिक्षण प्रबोधिनी के सभागार में आयोजित इस पहली बैठक में भारी हंगामा, मान-अपमान का दौर और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला।

दोपहर 2 बजे शुरू हुई यह बैठक शाम 7 बजे तक यानी पूरे 5 घंटों तक चली। इस दौरान सदस्यों के बीच व्याप्त असंतोष को दूर करने और उन्हें उनकी पसंदीदा समितियों में जगह दिलाने के लिए पदाधिकारियों को काफी पसीना बहाना पड़ा। काफी जद्दोजहद के बाद अंततः 10 विषय समितियों के लिए 83 सदस्यों का निर्विरोध चयन सुनिश्चित किया गया।

सीट बंटवारे के फॉर्मूले और सदस्यों के बीच खींचतान

प्रशासनिक स्तर पर स्थायी, वित्त, निर्माण, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी प्रमुख समितियों के लिए 100 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। सत्ताधारी भाजपा ने शिवसेना (शिंदे गुट), ठाकरे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का एक गुप्त फॉर्मूला पहले ही तैयार किया था, ताकि चयन निर्विरोध हो सके। हालांकि, जब वास्तविक प्रक्रिया शुरू हुई, तो कई सदस्यों ने अपनी पसंदीदा समितियों में शामिल होने के लिए अड़ियल रुख अपना लिया। कुछ सदस्यों ने तो दो से तीन अलग-अलग समितियों के लिए नामांकन दाखिल कर दिए थे। इस स्थिति को संभालने के लिए जिप अध्यक्ष अविनाश गलांडे और उपाध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

शिवसेना (ठाकरे गुट) में आंतरिक मतभेद और समाधान

बैठक के दौरान सबसे अधिक तनाव शिवसेना (ठाकरे गुट) के भीतर देखने को मिला। मूल योजना के अनुसार कृष्णा डोणगांवकर को जल संरक्षण समिति और मनोज गायके को स्थायी समिति के लिए प्रस्तावित किया गया था। लेकिन ऐन वक्त पर डोणगांवकर ने स्थायी समिति में जगह की मांग कर दी, जिससे विवाद बढ़ गया।

इस खींचतान के कारण घंटों तक गतिरोध बना रहा। कई दौर की गुप्त बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद एक स्वीकार्य समाधान निकाला गया। इसके बाद ही सदस्यों ने अपने अतिरिक्त आवेदन वापस लिए। यह आंतरिक गुटबाजी पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही, लेकिन अंततः निर्विरोध चयन का रास्ता साफ हुआ।

सभापतियों का चयन और विभागों का अंतिम आवंटन

बैठक के अंतिम चरण में सभी 83 सदस्यों के निर्विरोध चयन के साथ ही सभापतियों को विभागों का आवंटन किया गया। उपाध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल को कृषि तथा पशुपालन विभाग मिला। सचिन गरड को वित्त एवं निर्माण, अनीता मोठे को शिक्षा व स्वास्थ्य, मीनाक्षी पवार को महिला एवं बाल कल्याण और बालाजी सोनटक्के को समाज कल्याण समिति का सभापति बनाया गया।

जिप अध्यक्ष अविनाश गलांडे ने बताया कि लंबी प्रक्रिया के बावजूद निर्विरोध चयन होना जिला परिषद की एकता का प्रतीक है। बैठक में अतिरिक्त उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी वासुदेव सोलंके और राघवेंद्र घोरपड़े सहित सभी विभाग प्रमुख मौजूद रहे। अब जिला परिषद का कोरम पूरा होने से विकास कार्यों का रास्ता साफ हो गया है।

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