

Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project Delay: करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की जा रही नई जलापूर्ति योजना एक बार फिर तकनीकी बाधाओं में उलझ गई है। शहरवासियों को 12 जून से अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जायकवाड़ी बांध में घटते जलस्तर, साइफन प्रणाली में आई रुकावट और मुख्य पाइपलाइन में कई स्थानों पर रिसाव के कारण यह लक्ष्य फिलहाल अधूरा रह गया है।
प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद नई योजना से जलापूर्ति शुरू होने में अभी कुछ और दिनों की देरी होने की संभावना है। ऐसे में नागरिकों को पानी के लिए होने वाली परेशानी से तत्काल राहत मिलने की उम्मीद टूटती नजर आ रही है।
केंद्र सरकार की अमृत-2 योजना के तहत लगभग 2740 करोड़ रुपये की लागत से शहर के लिए नई जलापूर्ति परियोजना पर काम किया जा रहा है। पहले चरण में शहर को प्रतिदिन 200 एमएलडी पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था। गुढ़ी पाढवा के अवसर पर जायकवाड़ी बांध से साइफन प्रणाली के माध्यम से पानी उठाकर जैकवेल तक पहुंचाया गया था। इसके बाद जैकवेल से 2500 मिमी व्यास की मुख्य पाइपलाइन के जरिए पानी नक्षत्र वाड़ी स्थित जलशुद्धीकरण केंद्र तक लाया गया। चार जून तक यह पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक चलती रही, लेकिन बाद में अचानक तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं।
अधिकारियों के अनुसार जायकवाड़ी बांध का जलस्तर कम होने से साइफन प्रणाली से पानी उठाने में दिक्कतें आने लगीं। इसके कारण महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण को तीन दिनों तक पूरी प्रक्रिया रोकनी पड़ी। इसी दौरान यह भी सामने आया कि मुख्य पाइपलाइन के कई हिस्सों में रिसाव हो रहा है, जिससे परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो गई।
महापालिका आयुक्त अमोल येडगे ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि जैकवेल क्षेत्र में एक स्थान और नक्षत्रवाड़ी जलशुद्धीकरण केंद्र के पास तीन स्थानों पर पाइपलाइन में रिसाव पाया गया था। इसके बाद निर्माण एजेंसी जीवीपीआर कंपनी को तत्काल मरम्मत कार्य सौंपा गया। कंपनी ने मरम्मत का काम पूरा कर लिया है, लेकिन पाइपलाइन को पूरी तरह स्थिर होने और जोड़ मजबूत होने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इसी कारण जलापूर्ति शुरू करने में विलंब हो रहा है।
महापालिका और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों की लंबी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि फिलहाल जलापूर्ति साइफन प्रणाली के माध्यम से ही शुरू की जाएगी। इसके लिए 20 अश्वशक्ति क्षमता वाले तीन पंप लगाए गए हैं। इसके अलावा साइफन पाइप तक पानी पहुंचाने के लिए वैक्यूम पंप की भी व्यवस्था की गई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से पानी को जैकवेल तक पहुंचाया जा सकेगा।
प्रशासन के अनुसार शुक्रवार दोपहर के बाद नक्षत्र वाड़ी स्थित संयंत्र तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। शुरुआत में केवल 20 एमएलडी पानी एकत्रित किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो अगले दो से तीन दिनों में 1500 मिमी व्यास की पाइपलाइन के माध्यम से 35 से 40 एमएलडी अतिरिक्त पानी हर्सूल और जटवाड़ा क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे शहर में अतिरिक्त जलापूर्ति बढ़ाने की योजना है।
उच्च न्यायालय ने 12 जून से नई जलापूर्ति योजना के माध्यम से शहर को अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तय समय पर जलापूर्ति शुरू करना मुश्किल दिखाई दे रहा है। इससे स्पष्ट है कि शहरवासियों को अभी कुछ और दिनों तक पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
जैकवेल के निर्माण के लिए बनाए गए कॉफर डैम को तोड़कर पानी लेने का विकल्प फिलहाल प्रशासन के विचाराधीन नहीं है। महापालिका आयुक्त अमोल येडगे ने स्पष्ट किया कि यदि कॉफर डैम को तोड़ा गया तो शेष निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है। ठेका एजेंसी और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की भी यही राय है। इसलिए फिलहाल कॉफर डैम को यथावत रखते हुए अन्य विकल्पों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
नई जलापूर्ति योजना को लेकर शहरवासियों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। भीषण गर्मी और बढ़ती जलसमस्या के बीच लोग अतिरिक्त पानी की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा। यदि वर्तमान प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले कुछ दिनों में शहर को राहत मिल सकती है, अन्यथा जल संकट और गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट