

Chhatrapati Sambhajinagar Garware Stadium Construction Issue: छत्रपति संभाजीनगर विश्व मौसम दिवस के अवसर पर शहर में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है, पडेगांव से दौलताबाद तक पुराने मुंबई हाईवे के चौड़ीकरण के लिए करीब 800 छोटे-बड़े पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है।
वहीं, गरवारे स्टेडियम के साउथ पवेलियन निर्माण के लिए भी 75 पेड़ काटे जाने हैं। इसको लेकर शहर के पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है, नागरिक हर हफ्ते आंदोलन कर रहे हैं।
पिछले दिन उन्होंने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए पेड़ों पर 'पर्यावरण की गुढी' बांधी, पर्यावरण प्रेमियों ने पारंपरिक वेशभूषा में एकत्र होकर पेड़ों को बचाने का संदेश दिया।
इसमें महिलाओं व बच्चों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही, प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की गई व आगामी शनिवार को होने वाले आंदोलन की रूपरेखा भी तय की गई।
कुछ दिन पहले नागरिकों ने 'चिपको आंदोलन' की तर्ज पर पेड़ों से लिपटकर विरोध प्रदर्शन किया। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने भाग लिया और पेड़ों को बचाने की अपील की। यह अब धीरे-धीरे शहर में पर्यावरण संरक्षण की बड़ी मुहिम का रूप लेता जा रहा है।
पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। विकास कार्य जरूरी है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई घातक साबित हो सकती है। इनमें कई 300 साल पुराने धरगद सहित अन्य प्रजातियों के है।
ये शहर को बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करते है व अनेक पक्षियों का आश्रय भी है, नागरिकों का कहना है कि ये पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि प्राकृतिक धरोहर है, पर्यावरणप्रेमी रूपेश कलंत्री ने बताया कि सार्वजनिक निर्माण विभाग ने 718 पेड़ों के प्रभावित होने का आंकड़ा दिया है, जबकि मनपा के सर्वे में यह संख्या 748 बताई गई है। इसके अलावा वन विभाग क्षेत्र के पेड़ों का आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।