छत्रपति संभाजीनगर की ऐतिहासिक हिमरू फैक्ट्री का NHRC टीम ने किया दौरा, कारीगरों की सराहना

Handloom Industry Maharashtra: संभाजीनगर की ऐतिहासिक हिमरू फैक्ट्री का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने दौरा किया। पारंपरिक बुनाई कला की सराहना करते हुए संरक्षण और कारीगरों को सहयोग का भरोसा दिया।
NHRC Team Visits Historic Himroo Factory in Chhatrapati Sambhajinagar; Applauds Artisans
Sambhajinagar Traditional Textile Craft( Source: Social Media )
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Sambhajinagar Traditional Textile Craft: छत्रपति संभाजीनगर शहर के नवाबपुरा स्थित 14वीं सदी की ऐतिहासिक हिमरू फैक्ट्री का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने दौरा किया। इतिहास के अनुसार, तुगलक काल में राजधानी का दौलताबाद स्थानांतरण के दौरान हिमरू बुनकरों को दिल्ली से यहां लाया गया था।

उसी परंपरा को उनके वंशज आज भी जीवित रखे हुए हैं। यह रेशम व सूती धागों (जरी) की बेहतरीन कारीगरी का एक केंद्र है, जहां हाथ से बुने हुए शॉल, शालू कपड़े व परिधान तैयार किए जाते हैं।

इस दौरान आयोग के चेयरमैन व विशेष फैक्ट्री प्रतिनिधि मोहम्मद जमशेद ने पारंपरिक हैंडलूम बुनाई की प्रक्रिया को करीब से देखा व कारीगरों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी यह दुर्लभ कला आज भी अपने मूल स्वरूप में जीवित है व शहर की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।

साथ ही उन्होंने इसके संरक्षण व कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकारी स्तर पर हरसंभव सहयोग दिलाने का भरोसा भी दिलाया। फैक्ट्री प्रबंधन के अनुसार, हिमरू कला महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सशक्त माध्यम बन रही है।

सरकारी स्तर पर ठोस प्रयासों की आवश्यकता

इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया गया है, जिसमें अब तक 25 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है व 13 महिलाएं इस कला में कुशल हो चुकी हैं।

फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि सरकार की ओर से कुछ योजनाओं के तहत सहायता मिलती है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। कारीगरों को बेहतर सुविधाएं व बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि इस पारंपरिक कला को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। हिमरू कला को बचाने व आगे बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर ठोस प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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