

Sambhajinagar CSMC Standing Committee Meeting: छत्रपति संभाजीनगर शहर की जर्जर सड़कों, पेयजल व्यवस्था, भूमिगत सीवर परियोजना, 22 करोड़ रुपये के कथित अनियमितता प्रकरण की पुनः जांच, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान तथा विकास कार्यों में लगातार हो रही देरी को लेकर गुरुवार को मनपा की स्थायी समिति की बैठक में प्रशासन को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। समिति के सदस्यों ने एक के बाद एक कई मुद्दे उठाते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया। कई मामलों में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर बैठक का माहौल तनावपूर्ण बना था।
नगरसेवक राज वानखेडे, अमित भुईगल, पठाण अजहर, नगरसेविका श्वेता त्रिवेदी ने शहर की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य लंबे समय से अधर में लटके हैं। इसका खामियाजा आम नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधियों को भी भुगतना पड़ रहा है। लोगों के सवालों का जवाब देना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।
बैठक में सबसे पहले शहर की सड़कों पर बने गड्ढों का मुद्दा नगरसेवक राज वानखेड़े ने उठाया। उनके साथ अन्य सदस्यों ने बताया कि सड़क मरम्मत के लिए लगभग 99 लाख रुपये का प्रस्ताव पहले ही स्वीकृत हो चुका है, इसके बावजूद निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। इससे बरसात के बीच शहर की अधिकांश सड़कें खतरनाक बनी हुई हैं।सदस्यों ने विभिन्न क्षेत्रों की खराब सड़कों का उल्लेख करते हुए पूछा कि आखिर मरम्मत कार्य कब शुरू होगा। अतिरिक्त आयुक्त रणजीत पाटिल ने बैठक में आश्वासन दिया कि उपलब्ध राशि से पहले प्रमुख मार्गों के गड्ढे भरे जाएंगे और प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि शहर में लगभग 200 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बावजूद कई परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ी। इस पर प्रशासन ने कहा कि सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी तथा संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृति मिलने के तीन महीने के भीतर कार्यारंभ आदेश जारी किए जाएं।
विशेषकर, शहर के सीवरेज व पानी की लाइन बिछाने के लिए शहर के कई मार्गों पर गड्ढे खोदे गए, उन गड्ढों के चलते वाहन धारकों सहित आम नागरिकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड रहा है। इस पर अतिरिक्त आयुक्त रणजीत पाटिल ने साफ किया कि गड्ढों को भरने का काम भी जल्द पूरा किया जाएगा।
शहर की पेयजल योजना की प्रगति की जानकारी भी बैठक में दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में उच्च स्तर पर समीक्षा हो चुकी है और आगे की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।इसके अलावा शहर के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों तथा सातारा-देवलाई क्षेत्र में चल रही लगभग 850 करोड़ रुपये की भूमिगत सीवर परियोजना पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में कुछ राशि की बचत हुई है, जिसका उपयोग नियमानुसार किया जाएगा।
स्थायी समिति के सदस्यों ने सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारियों के लंबित भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि वर्षों की सेवा देने वाले कर्मचारियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
बैठक के दौरान 22 करोड़ रुपये के कथित अनियमितता प्रकरण की पुनः जांच का विषय भी गरमाया रहा। सदस्यों ने प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी और जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा। कुछ सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि महत्वपूर्ण मामलों में समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे कठोर रुख अपनाएंगे।
नगरसेवक राज वानखेडे द्वारा लेखा परीक्षण को लेकर उठाए गए गंभीर सवालों पर मनपा के लेखा परीक्षक शिवाजी नाईकवाडी ने बैठक में जानकारी दी कि नगररचना विभाग की लगभग 13 हजार फाइलों का वर्ष 2018 के बाद से लेखा परीक्षण नहीं हो सका है।
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के अनेक विभागों में कर्मचारियों की कमी के कारण यह कार्य लगातार प्रभावित हो रहा है। यांत्रिकी विभाग का लेखा परीक्षण भी कई वर्षों से नहीं हुआ है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन केवल समिति सदस्यों की ही नहीं, बल्कि स्थायी समिति के अध्यक्ष के निर्देशों का भी समय पर पालन नहीं कर रहा है। कई बैठकों में दिए गए निर्देशों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से असंतोष बढ़ता जा रहा है।
बैठक के अंत में सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि सड़क, पानी, विकास कार्य और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में लगातार हो रही देरी के कारण जनता का आक्रोश जनप्रतिनिधियों को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि अगली बैठक तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो समिति अधिक कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगी।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट