सिटी चौक पुलिस की लापरवाही उजागर, कोर्ट ने खारिज की 'बी' समरी रिपोर्ट

कोर्ट ने सिटी चौक पुलिस की अधूरी जांच और CCTV फुटेज न जुटाने के कारण बी समरी रिपोर्ट खारिज की है। साथ ही फरियादी की प्रोटेस्ट पिटीशन को निजी शिकायत के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।
कोर्ट बी समरी रिपोर्ट खारिज (pic credit; social media)
कोर्ट बी समरी रिपोर्ट खारिज (pic credit; social media)
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Chhatrapati Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर के सिटी चौक इलाके में वॉशिंग सेंटर और घर में हुई तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की अधूरी जांच कोर्ट में सामने आ गई। प्रथम वर्ग न्याय दंडाधिकारी बीडी चोखाट ने पुलिस की बी समरी रिपोर्ट खारिज कर फरियादी की प्रोटेस्ट पिटीशन को निजी शिकायत के रूप में पंजीयन करने का आदेश दिया।

फरियादी शेख रिजवान शेख इस्माइल ने बताया कि 29 जून 2024 की सुबह शेख जावेद शेख यूसुफ और लगभग 30-40 लोगों ने उनके वॉशिंग सेंटर में प्रवेश कर सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, टीन का गेट तोड़ा और घर में घुसकर सामान तहस-नहस कर दिया। इसके बावजूद पुलिस ने जांच में आवश्यक कदम नहीं उठाए।

जांच अधिकारी ने सीसीटीवी फुटेज जब्त करने में नाकामी दिखाई। फरियादी द्वारा पेश किए गए महत्वपूर्ण सबूत और छायाचित्रों को पुलिस ने अनदेखा किया और अधूरी बी समरी रिपोर्ट दाखिल कर दी। न्यायालय ने इस लापरवाही को स्पष्ट रूप से देखा और कहा कि प्राथमिक दृष्टि से फरियादी के पास पर्याप्त सबूत हैं।

कोर्ट ने फरियादी की ओर से पेश किए गए दस्तावेज, छायाचित्र और कानूनी निर्णयों की गंभीरता को स्वीकार किया और उन्हें नई शिकायत के रूप में पंजीकृत कर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। इस मामले में वरिष्ठ वकील सुरेश मेन्चिरेल ने पैरवी की। उन्हें एडवोकेट शिवानी जाधव जायसवाल ने सहयोग दिया।

अधिकारियों ने बताया कि केस दर्ज करने और जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक कदम को सौंपी गई थी। लेकिन सीसीटीवी फुटेज नहीं जुटाने, छायाचित्रों की अनदेखी और तथ्यों की अधूरी रिपोर्ट कोर्ट में खुलकर सामने आई।

फरियादी ने कहा कि इस लापरवाही के कारण उनका नुकसान बढ़ा और न्याय की प्रक्रिया धीमी हुई। अब कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को पूरी जांच कर नई शिकायत के आधार पर कार्रवाई करनी होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से नागरिकों का पुलिस पर भरोसा कमजोर होता है और जांच में पारदर्शिता की कमी सामने आती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी महत्वपूर्ण सबूत जुटाने के बाद ही जांच पूरी मानी जाएगी।

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