छत्रपति संभाजीनगर: एमपीएससी चयनित उम्मीदवार को नियुक्ति से इनकार पर हाईकोर्ट सख्त, 4 हफ्ते में नौकरी का आदेश

Sambhajinagar MPSC Recruitment: MPSC से चयनित उम्मीदवार को अस्थायी दिव्यांगता बताकर नियुक्ति से इनकार करने पर औरंगाबाद खंडपीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर 4 सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश दिया।
Chhatrapati Sambhajinagar: High Court Takes Strict Stance on Denial of Appointment to MPSC-Selected Candidate; Orders Job Within 4 Weeks
Maharashtra Administrative Tribunal( Source: Social Media )
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Maharashtra Administrative Tribunal: छत्रपति संभाजीनगर महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के जरिए कृषि उपसंचालक (ग्रुप-ए) पद पर चयनित होने के बावजूद एक उम्मीदवार को अस्थायी दिव्यांगता का कारण बताकर नियुक्ति देने से इनकार करना भारी पड़ गया है।

बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के न्या. नितिन सूर्यवंशी व न्यायमूर्ति वैशाली पाटील-जाधव की खंडपीठ ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उसकी याचिका खारिज कर संबंधित उम्मीदवार को 4 सप्ताह के भीतर नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

विशाल ढोले ने वर्ष 2021 में महाराष्ट्र राजपत्रित कृषि तकनीकी सेवा परीक्षा के तहत 203 पदों के लिए हुई चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। दिव्यांग कोटे से चयन के बाद एमपीएससी ने उनके नाम की सिफारिश सरकार को भेजने के बाद यह कहते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया कि उम्मीदवार की दिव्यांगता (पैरानॉइड स्किजोफ्रेनिया 40 प्रश) अस्थायी है व स्थायी नहीं है।

इस निर्णय के खिलाफ उम्मीदवार ने महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (मैट) में याचिका दायर की थी। मैट ने 25 जून 2024 को उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नियुक्ति देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ सरकार ने उच्च न्यायालय में अपील की थी।

15 जनवरी 2025 का आदेश रद्द

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष के 13 सितंबर 2022 के शासन निर्णय का हवाला देते हुए तर्क कि अस्थायी दिव्यागता वाले व्यक्तियों को स्थायी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता, को न्यायालय ने खारिज कर दिया, अदालत ने स्पष्ट किया कि उक्त शासन निर्णय सिर्फ सरकारी योजनाओं के लाभतक सीमित है व इसका नियुक्तियों से कोई संबंध नहीं है।

यह भी कहा कि जेजे अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने भी विशाल को दिव्यांग कोटे के लिए पात्र बताया था। खंडपीठ का इससे पहले 15 जनवरी 2025 को दिया गया अंतरिम आदेश, जिसमें संबंधित पद को रिक्त रखने का निर्देश दिया गया था, वह भी अब रद्द किया गया है, याचिकाकर्ता की ओर से एड. एवी लवटे व प्रतिवादी की ओर से एड. एएस खेड़कर ने पैरवी की।

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