गुढ़ी पाड़वा पर छत्रपति संभाजीनगर को बड़ी राहत, नाथसागर से 200 MLD पानी का रास्ता खुला

Aurangabad Water Supply: पानी संकट झेल रहे संभाजीनगर को गुढ़ी पाड़वा पर बड़ी राहत मिली। नाथसागर की 2,740 करोड़ की योजना में सायफन तकनीक से 1 चरण में 200 MLD पानी का मार्ग तय समय से 1 साल पहले खुला।
Major Relief for Chhatrapati Sambhajinagar on Gudi Padwa: Path Cleared for 200 MLD of Water from Nath Sagar.
Chhatrapati Sambhajinagar Infrastructure Project ( Source: Social Media )
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Chhatrapati Sambhajinagar Infrastructure Project: छत्रपति संभाजीनगर शहर के लंबे समय से चले आ रहे पानी संकट के बीच गुढ़ी पाड़वा के शुभ अवसर पर बड़ी राहत मिली है। नाथसागर से शहर के लिए शुरू की गई 2,740 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना में 'सायफन' तकनीक का उपयोग कर पहले चरण में 200 एमएलडी पानी लाने का मार्ग खोल दिया गया है।

खास बात यह है कि यह उपलब्धि तय समय से लगभग एक वर्ष पहले हासिल की गई है। टाटा-भिलाई प्लांट व महाबलेश्वर जल योजना के बाद इतनी बड़ी मात्रा में सायफन तकनीक का उपयोग करने वाला यह राज्य का प्रमुख प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

इससे एक वर्ष का समय बचा है व परियोजना के आगे के चरणों को गति मिली। योजना के अनुसार जैकवेल निर्माण पूर्ण होने के बाद ही पानी आपूर्ति शुरू की जानी थी, इसके लिए कॉफर डैम हटाकर उसमें पानी छोड़ा जाना था।

लेकिन जैकवेल व पंपगृह निर्माण में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती थी। बढ़ती पानी की कमी व नागरिकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने वैकल्पिक समाधान खोजा।

इसी के तहत 'सायफन' तकनीक को अपनाया गया, जो इस परियोजना के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। यह तकनीक जलस्तर के अंतर के आधार पर पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सक्षम होती है।

इसके जरिए कॉफर डैम को हटाए बिना ही पानी को जैकवेल तक पहुंचाया गया। इस प्रक्रिया में तकनीकी सटीकता व निरंतर निगरानी बेहद महत्वपूर्ण रही। इंजीनियरों के समन्वय से इस प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया गया।

मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे ने सायफन का गहन अध्ययन कर इसे लागू करने का निर्णय लिया, कार्यकारी अभियंता तुषार टेकवड़े की देखरेख में अकोला की 'महावीर हाइड्रो प्रोजेक्ट' संस्था ने तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया।

जैकवेल अधूरा, फिर भी शुरू हुआ जलप्रवाह

जैकवेल का निर्माण अभी नहीं हुआ है व पूर्ण क्षमता वाले पंपगृह के निर्माण में समय लगेगा। इसके बावजूद सायफन प्रणाली से पानी पहुंचाना संभव हो सका है। इससे शहर को अतिरिक्त पानी मिलना शुरू हो गया है।

शेष कार्य पूर्ण होने के बाद यह योजना पूरी क्षमता से चालू होगी व लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान मिल सकेगा, छत्रपति संभाजीनगर की जल व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से समृद्ध रही है।

मलिक अंबर निर्मित नहर प्रणाली आज भी इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सायफन जैसी पारंपरिक तकनीक का आधुनिक रूप में उपयोग कर जल संकट का समाधान खोजा गया।

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