छत्रपति संभाजीनगर: मनपा को फटकार, नालों की सफाई के निर्देश; शहर में जलनिकासी बाधित होने से बढ़ी चिंता

Aurangabad Drainage Issue: संभाजीनगर में बेमौसम बारिश के बाद नालों में जमा कचरे से जलनिकासी बाधित हो गई है। बढ़ते बाढ़ खतरे को देखते हुए मनपा प्रशासन को तुरंत सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
Chhatrapati Sambhajinagar: Municipal Corporation Rapped; Directed to Clean Drains; Concerns Mount as City's Drainage System Remains Obstructed.
Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation Cleaning Drive ( Source: Social Media )
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Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation Cleaning Drive: छत्रपति संभाजीनगर शहर में हुई बेमौसम वर्षों के बाद नालों में जमा कचरे के चलते बाढ़ का खतरा बना हुआ है। कई क्षेत्रों में जल निकासी पूरी तरह बाधित होने से नागरिकों में महा नगरपालिका कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है।

इस आलोक में मनपा स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये ने प्रशासन को तत्काल नालों की सफाई करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि शहर के विभिन्न हिस्सों में नालों की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है, अंजलि थिएटर क्षेत्र के नागेश्वरवाड़ी नाले में भारी मात्रा में कचरा जमा होने से पानी का प्रवाह रुक गया है। वहीं, औरंगपुरा स्थित जिला परिषद मैदान के पास भी नालों में गंदगी के चलते दुर्गंध फैल रही है।

जनता भी बने जिम्मेदार

शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए सिर्फ स्थानीय निकाय अर्थात महानगरपालिका को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए शहरवासी भी काफी हद तक जिम्मेदार माने जाते है।

येन-केन प्रकारेण वे शहर को बदसूरत बनाने में आमादा रहते है। जहां जगह मिले वहां कचरा फेंककर अन्य नागरिकों के साथ ही शहर को साफ-सुथरा रखने का बीड़ा उठाने वाली मनपा को भी परेशान करते रहते हैं।

स्मार्ट सिटी बनने की ओर की ओर अग्रसर शहरवासियों की नकारात्मक व नालों में गंदगी फैलाने की प्रवृत्ति के चलते समस्या दिन-ब-दिन बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर को सखक-सुथरा रखना केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है और उन्हें अपना दायित्व समझना होगा।

नागेश्वरवाड़ी नाले में भारी मात्रा में कचरा जमा

निराला बाजार जैसे व्यस्त क्षेत्रों में भी नालों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। शिवसेना भवन क्षेत्र में भी कचरे के ढेर साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। यदि समय पर नालों की सफाई नहीं की गई, तो शहर में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

यही नहीं, बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। हर वर्ष मानसून पूर्व नाला सफाई अभियान की घोषणा की जाती है, मगर जमीनी स्तर पर काम आधा अधूरा ही नजर आता है। इस साल भी असमय बारिश के बावजूद सफाई नहीं होने के चलते प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठना लाजमी हैं।

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