भीषण गर्मी में तवे की तरह तप रही हैं कांक्रीट की सड़कें; 34°C तापमान में 50°C जैसी गर्मी का अहसास, नागरिक त्रस

बढ़ते कांक्रीटीकरण और पेड़ों की कमी के कारण शहर 'कांक्रीट के जंगल' में तब्दील हो गए हैं। दोपहर में सड़कें 50 डिग्री तक तप रही हैं, जिससे नागरिकों का स्वास्थ्य खतरे में है।
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Maharashtra Climate Change News: महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में जारी भीषण गर्मी के बीच शहरी क्षेत्रों में कांक्रीट की सड़कों ने हालात और कठिन बना दिए हैं। शहर की सड़कें दोपहर के समय तवे की तरह तप रही हैं, जिससे आमजन के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। अधिकतम तापमान भले ही 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया हो, लेकिन सड़कों पर महसूस होने वाली गर्मी 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रही है।

शहर में पिछले एक दशक में तेजी से कांक्रीट सड़कों का विस्तार हुआ है। डामर की तुलना में कांक्रीट ऊष्मा को अधिक समय तक संचित रखता है, जिसके कारण दिनभर की गर्मी रात तक बनी रहती है। इसके साथ ही, हरियाली में आई कमी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

शहर बना ‘कांक्रीट का जंगल’

करीब 10 वर्ष पहले तक शहर में डामर की सड़कें और किनारों पर छायादार पेड़ों की भरमार थी। लेकिन विकास कार्यों के तहत चौड़ीकरण और कांक्रीटीकरण के चलते नीम, पीपल और बरगद जैसे बड़े पेड़ों की कटाई कर दी गई। परिणामस्वरूप अब शहर का स्वरूप ‘कांक्रीट के जंगल’ जैसा हो गया है, जहां दूर-दूर तक छांव का अभाव है।

दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा

तेज गर्मी के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। नागरिक आवश्यक कार्यों को सुबह या शाम के समय ही निपटाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

तपती सड़कों और छांव की कमी के कारण लोगों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और पैरों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूर और सड़क पर काम करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें खुले में लंबे समय तक काम करना पड़ता है।

सिग्नल पर भी नहीं राहत

यातायात संकेतों पर रुकने के दौरान वाहन चालकों को भीषण धूप में खड़ा रहना पड़ता है, क्योंकि वहां छांव की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे दुपहिया चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हरियाली और छायादार मार्गों की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरी नियोजन में हरियाली और छायादार मार्गों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाले समय में कांक्रीट की ये सड़कें आमजन के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। प्रशासन को सड़क निर्माण के साथ-साथ वृक्षारोपण और छाया की व्यवस्था पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

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