अमरावती को मिली वैधानिक राजधानी की मान्यता, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन बिल लोकसभा में पास
संसद ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे अमरावती अब राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी बन गई है। यह कानून 2 जून 2024 से प्रभावी माना जाएगा।
Amaravati Capital Andhra Pradesh Reorganisation Bill 2026: संसद ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने संबंधी विधेयक को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक, 2026 को संक्षिप्त चर्चा एवं गृह राज्यमंत्री नित्यानन्द राय के जवाब के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी।
राजग के प्रमुख घटक दल तेदेपा और राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने की दिशा में इस विधेयक को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि आंध्र प्रदेश विधानसभा में 28 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें भारत सरकार से राज्य की राजधानी के रूप में अमरावती को वैधानिक दर्जा दिलाने के लिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की कुछ धाराओं में संशोधन करने का अनुरोध किया गया।
विधेयक के कानून बनने के बाद अमरावती को दो जून 2024 से आंध्र प्रदेश की राजधानी माना जाएगा। वहीं कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने कहा कि आंध्र प्रदेश के साथ संसद में किए गये वादों को पूरा किया जाना चाहिए। आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के विकास के लिए इन वादों को पूरा किया जाना चाहिए। पोलावरम परियोजना अभी तक अधूरी पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दक्षिण भारत के राज्यों की अनदेखी कर रही है।
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कृष्णानदी के तट पर बनायी जा रही है राजधानी
नागर विमानन मंत्री एवं तेदेपा नेता के राममोहन नायडू ने कहा कि यह राजधानी कृष्णानदी के तट पर बनायी जा रही है। यह विश्व स्तरीय राजधानी होगी और दुनिया भर के लोग इसमें निवेश करने आएंगे। भारत के इतिहास में आंध्र प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके पास विभाजन के बाद कोई राजधानी नहीं है।
आज आंध्र प्रदेश के लोगों के पास विकास के लिए तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के अलावा उम्मीद की कोई किरण नहीं है। आज उन्हें इस विधेयक को लेकर गर्व महसूस हो रहा है क्योंकि आंध्र प्रदेश के लोगों और अमरावती के किसानों एवं महिलाओं सहित सभी निवासियों की आकांक्षा को संसद में पूरा किया जा रहा है। अमरावती के किसानों ने राजधानी के लिए जगह दान की।
पिछली सरकार के शासनकाल में अमरावती को राज्य की राजधानी नहीं बनाने के निर्णय के खिलाफ वहां की महिलाओं ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार की मशीनरी ने प्रदर्शन कर रही एक गर्भवती महिला पर प्रहार किया।
