चिखला माइंस में मॉयल के पेड़ लगाने के दावों की खुली पोल, निरीक्षण में मिले सिर्फ 213 सूखे पेड़

Prashant Padole News: भंडारा जिले के चिखला माइंस परिसर में मॉयल कंपनी के पेड़ लगाने के दावों की पोल खुल गई, जब सांसद डॉ। प्रशांत पडोले के निरीक्षण में हजारों की जगह केवल सूखे 213 पेड़ पाए गए।
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Prashant Padole (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
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Chikhla Mines Plantation News: सरकारी स्वामित्व वाली मॉयल कंपनी पिछले कई वर्षों से कागजी रिकॉर्ड में हजारों पेड़ लगाए जाने का दावा करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत ने प्रबंधन के इन सभी दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है। मॉयल प्रबंधन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और माइंस परिसर को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से चिखला माइंस परिसर में करीब दो से तीन हजार पेड़ लगाए गए हैं।

लेकिन इस कागजी विकास की कलई तब खुल गई जब क्षेत्र के सांसद डॉ। प्रशांत पडोले ने स्वयं चिखला माइंस परिसर के पौधारोपण स्थल पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। रिकॉर्ड में दर्ज हजारों जीवित पेड़ों की जगह मौके पर केवल 213 पेड़ ही पाए गए, और सबसे गंभीर बात यह रही कि वे पेड़ भी पूरी तरह सूखे, निर्जीव तथा मृत अवस्था में नजर आए।

नागरिकों में भारी नाराजगी और आक्रोश

इस बड़े खुलासे के बाद पूरे तुमसर क्षेत्र में मॉयल कंपनी के खिलाफ नागरिकों में भारी नाराजगी और आक्रोश का माहौल बन गया है। सरकारी रिकॉर्ड में झूठे आंकड़े स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर रही है और सरकारी रिकॉर्ड में झूठे आंकड़े दिखाकर वरिष्ठ अधिकारियों तथा जनता को गुमराह किया जा रहा है।

मॉयल कंपनी का पौधारोपण दावा निकला पूरी तरह हवा हवाई

निरीक्षण के दौरान यह मुद्दा पूरे समय गंभीर और संवेदनशील बना रहा। सांसद डॉ. प्रशांत पडोले के सामने ही कंपनी के झूठे दावों की सच्चाई उजागर होने से मॉयल प्रबंधन की पूरी कार्यप्रणाली और उनकी मंशा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में बजट के अनुसार हजारों पेड़ जमीन पर लगाए गए होते, तो आज चिखला माइंस क्षेत्र के पर्यावरण की तस्वीर कुछ और ही होती।

मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग

चिखला मॉयलखान के अभिकर्ता एवं महाप्रबंधक उमाकांत भुजाडे ने कहा कि क्षेत्रवासियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। केवल एक ही पाइंट का निरीक्षण सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने माइंस परिसर के केवल एक ही पॉइंट पर किए गए पेड़ों के काम का निरीक्षण किया है।

जिस ठेकेदार को इस क्षेत्र में पेड़ लगाने का टेंडर आवंटित किया गया है, उसके साथ हुए अनुबंध के मुताबिक जो भी पेड़ सूखेंगे या मृत होंगे, उन्हें दोबारा लगाने और उनकी देखभाल करने का पूरा जिम्मा संबंधित ठेकेदार का ही है। सूखे पौधों को बदलकर वहां नए पौधे लगाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।

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