धारणी के चोराकुंड वन क्षेत्र में 4 गौर और 2 हिरन मृत मिले, जांच में जुटा वन विभाग

Amravati Dharni Forest: मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट के चोराकुंड वन परिक्षेत्र में 4 गौर और 2 हिरनों की संदिग्ध मौत से वन विभाग सतर्क हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी।
Melghat Tiger Project Wildlife Death
मृत गौर (सोर्स - फाईल फोटो)
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Melghat Tiger Project Wildlife Death: लघाट टाइगर प्रोजेक्ट के अंतर्गत आने वाले सपना वन्यजीव विभाग के चोराकुंड वन परिक्षेत्र से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के जंगलों में 4 गौर (रानगवा) और 2 हिरनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से पूरे वन विभाग में खलबली मच गई है। घटना के सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों में भारी निराशा है और पूरे वन क्षेत्र में सुरक्षा व सतर्कता को कई गुना बढ़ा दिया गया है।

वन विभाग को आशंका है कि जंगल के अन्य दुर्गम हिस्सों में भी कुछ और वन्यजीव मृत अवस्था में हो सकते हैं। इसी डर के चलते विभाग की विशेष टीमों द्वारा घने जंगलों में सघन सर्च अभियान (खोज मुहिम) तेज कर दिया गया है।

दो अलग-अलग वनखंडों में मिले वन्यजीवों के शव

प्राप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम जब रोजाना की तरह सुरक्षा गश्त पर निकली थी, तब उन्हें वनखंड क्रमांक 585 में 3 गौर और 1 हिरन मृत अवस्था में दिखाई दिए। इसके ठीक बाद, समीप के ही वनखंड क्रमांक 586 में भी जांच करने पर 1 गौर और 1 हिरन का शव बरामद किया गया। गश्ती दल ने बिना समय गंवाए तुरंत इसकी सूचना वायरलेस के जरिए अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट के क्षेत्र संचालक (फील्ड डायरेक्टर) आदर्श रेड्डी, उपवन संरक्षक कीर्ती जमदाळे, सहायक वन संरक्षक शिंदे, वन परिक्षेत्र अधिकारी खेरड़े तथा वन्यजीव प्रेमी राकेश महल्ले ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर बारीक निरीक्षण किया। मृत वन्यजीवों का पंचनामा कर पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम द्वारा मौके पर ही पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद सभी वरिष्ठ अधिकारियों और गवाहों की उपस्थिति में वन्यजीवों के शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन अधिकारियों का कहना है कि बिसरा और पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक व वैज्ञानिक वजह साफ हो सकेगी।

जलस्रोतों की जांच शुरू, मौत का कारण अब भी अस्पष्ट

इस घटना के बाद वन विभाग की टीम ने आसपास के सभी प्राकृतिक जलस्रोतों और तालाबों की बारीकी से जांच की है। भीषण गर्मी के कारण कुछ स्थानों पर पानी पूरी तरह सूख चुका है, जबकि जिन स्थानों पर पानी उपलब्ध था, वहां से पानी के नमूने (सैंपल) लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। हालांकि, प्राथमिक जांच में अधिकारियों ने पानी में किसी भी प्रकार के जहरीले या रासायनिक तत्व नहीं मिलने की बात कही है।

वर्तमान में वन्यजीवों की मौत का कारण पूरी तरह अस्पष्ट बना हुआ है। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि अत्यधिक गर्मी, किसी संक्रामक बीमारी, दूषित पानी या फिर शिकारियों द्वारा दिए गए किसी विषाक्त पदार्थ के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। इस घटना ने मेलघाट जैसे सुरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है।

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