

Amravati Dafrin Hospital NICU Fire Safety: अमरावती जिला महिला अस्पताल डफरीन के एनआईसीयु में हुई भीषण आग की घटना के बाद नवजातों के उपचार की व्यवस्था को जल्द पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अस्पताल में 2 नए मिनी एनआईसीयु कक्ष स्थापित किए जा रहे हैं।
जिनमें क्रमश: 12 और 17 बेड की क्षमता होगी। दोनों कक्षों को जल्द से जल्द मरीजों की सेवा में शुरू करने के लिए काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इस तरह कुल 29 नवजातों के उपचार की क्षमता तैयार होगी।
नई एनआईसीयु व्यवस्था के साथ अस्पताल में आग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष फायर सेफ्टी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। उच्चस्तरीय बैठक में अग्निशमन अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा उपायों पर भी बर्चा हुई।
अमरावती जिला के भाजपा महिला प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक चित्रा वाध ने अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद पत्र परिषद में कहा कि जांच में जो भी दोषी कया जाए, उसे निलंबित कर उसके खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज किया जाना चाहिए, अस्पताल के फावर ऑडिट को लेकर 25 जून को पत्र जारी हुआ था।
लोनिवि की ओर से 30 जून और 22 अगस्त को निरीक्षण का दावा किया गया, जबकि अस्पताल प्रशासन के अनुसार इन तारीखों पर कोई अधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा, लोनिधि ने स्टाफ उपलब्ध नहीं होने का कारण बताया।
लोनिवि के अभियंता शेंडे और कर्मचारी सानप की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी कितना भी प्रभावशाली हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा, सरकार द्वारा गठित उत्वस्तरीय समिति की रिपोर्ट के साथ आपराधिक कार्रवाई भी जरूरी है
अमरावती जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय, मुंबई के आयुक्त संजय काटकर के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति ने अमरावती के निजी अस्पतालों का दौरा कर उपचाररत 36 नवजातों की स्थिति का जायजा लिया।
अधिकारियों ने परिजनों से भी संवाद कर बच्चों की वर्तमान स्थिति और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उपसंचालक स्वास्थ्य सेवा अकोला मंडल डॉ। सुशीलकुमार वाघचौरे और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ। प्रवीण पारिसे उपस्थित थे।