अमरावती में जलापूर्ति संकट; 427 करोड़ का भारी बकाया और करोड़ों का घाटा, निजीकरण की ओर बढ़ रही व्यवस्था?
अमरावती में जल वितरण संकट गहरा, 427 करोड़ रुपये का बकाया। नागरिकों से सहयोग की अपील, निजीकरण की संभावना।
Amravati Water Supply News: अमरावती शहर की जलापूर्ति व्यवस्था गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक संकट से गुजर रही है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की कमजोर वसूली प्रणाली के चलते बकाया राशि बढ़कर 427 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिससे पूरी योजना के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, कुल बकाया में 200 करोड़ रुपये अमरावती महानगरपालिका पर, जबकि 227 करोड़ रुपये आम उपभोक्ताओं से वसूल किए जाने बाकी हैं। वर्ष 2025-26 के लिए 49 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 23 मार्च तक केवल 24 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं।
हर साल करोड़ों का घाटा
जलापूर्ति पर प्रतिवर्ष लगभग 42 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि कम वसूली के कारण 12 से 13 करोड़ रुपये का वार्षिक घाटा हो रहा है। हर महीने 3.5 से 4 करोड़ रुपये खर्च होने से आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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शहर में 42,940 उपभोक्ताओं पर 5 हजार रुपये से अधिक और 19,805 उपभोक्ताओं पर 50 हजार रुपये से अधिक का बकाया है। इसके बावजूद अब तक केवल 832 कनेक्शन ही काटे गए हैं, जिससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
असमान जल वितरण से नाराजगी
शहर में जल वितरण व्यवस्था भी असंतुलित बनी हुई है। बिल भरने वाले और बकायेदारों को लगभग समान पानी आपूर्ति मिल रही है, जिससे ईमानदार उपभोक्ताओं में असंतोष है। मोटर पंप का उपयोग करने वालों को अधिक दबाव से पानी मिल रहा है, जबकि सामान्य नागरिकों को सीमित समय के लिए कम दबाव में पानी मिलता है।
अधिकारियों के अनुसार, हर महीने बिजली पर ही करीब 1.60 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में जलापूर्ति व्यवस्था के निजीकरण की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
उपकार्यकारी अभियंता संजय लेवरकर ने नागरिकों से अपील की है कि वे बकाया राशि जल्द जमा कर जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सहयोग करें।
