

Amravati MLC Election: स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव के मतदान में अब महज कुछ 4 दिन शेष रह गए हैं और राजनीतिक घटनाक्रम लगातार उलटपलट होता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख को नागपुर के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उनके रविवार से फिर चुनाव मैदान में सक्रिय होने की घोषणा ने चुनावी मुकाबले को नया मोड़ दे दिया था।
किंतु अब जानकारी के अनुसार और करीब तीन दिन तक आराम करने की बात सूत्रों ने दी है। हर्षजीत को और तीन दिन आराम की आवश्यकता है तो, ऐसी स्थिति में मतदान को समय ही नहीं बचता। इसके चलते यह स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस शुरू से ही अब तक सिर्फ हवा में तीर चला रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी के बीच संभावित समझौते को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय पर नहीं पहुंचे।
राजनीतिक उथलपुथल के बीच कांग्रेस की चुनाव प्रभारी एवं पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर का अचानक मुंबई रवाना होना भी चर्चाओं का विषय बना हुआ है। लगातार बदलते समीकरण, संभावित राजनीतिक समझौते और अदालत में लंबित विवादों के कारण अमरावती विधान परिषद चुनाव अब बेहद रोचक और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबले में बदलता नजर आ रहा है।
उधर चुनाव विभाग ने मतदान की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी दी है. चुनाव में प्रवीण पोटे भाजपा, हर्षजीत देशमुख कांग्रेस और डॉ. नीलेश विश्वकर्मा वंचित बहुजन आघाड़ी मैदान में हैं। 18 जून को मतदान के लिए हल्के गुलाबी रंग की मतपत्रिका तथा विशेष बैंगनी स्केच पेन का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
उल्लेखनीय है कि निर्दलीय उम्मीदवार विप्लव बाजोरिया की नामांकन रद्द होने के खिलाफ दायर याचिका पर नागपुर हाईकोर्ट में सुनवाई 17 जून को होगी। मतदान से एक दिन पहले आने वाला यह फैसला उनकी चुनावी संभावनाओं पर असर डाल सकता है।
कांग्रेस उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि वे चुनाव मैदान में बने हुए हैं और वे अस्पताल में रहते हुए भी वे मतदाताओं के संपर्क में थे. वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख ने कहा कि हर्षजीत देशमुख पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं, लेकिन चुनाव नजदीक होने के कारण पार्टी सभी राजनीतिक परिस्थितियों पर विचार कर रही है।
वहीं वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार डॉ. नीलेश विश्वकर्मा ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व और प्रकाश आंबेडकर से चर्चा हुई है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का समर्थन मिलने पर उनकी स्थिति और मजबूत होगी, वह पूरी ताकत से चुनाव लड़ने को तैयार है।