

Amravati Waste Collection: कोणाक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा। लि। के करार को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने आदेश जारी किया था। मगर अब उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे (अंतरिम रोक) आदेश जारी कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस स्टे आर्डर के बाद शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति फिलहाल टल गई है।
अब यह साफ होता दिखाई दे रहा है, कि शहर में कचरा संकलन के लिए फिलहाल फिर कोणार्क कंपनी काम संभाल सकती है। हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने 2 सितंबर को दिए फैसले में कोणार्क और 'अर्बन एनवायरो वेस्ट मैनेजमेंट' को अपात्र मानते हुए करार रद्द कर दिया था और मनपा को पात्रता संबंधी प्रक्रिया पुनः पूरी करने के निर्देश दिए थे।
इस फैसले के खिलाफ कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर ने 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोणार्क की ओर से एड। सिद्धार्थ भटनागर व एड. सम्राट शिंदे ने पक्ष रखा, वहीं मनपा की ओर से एड. लांडगे व वरिष्ठ अधिवक्ता एड. बलबीर सिंह ने पैरवी की।
पी. गोपीनाथ रेड्डी कंपनी की ओर से एड. गुरुकृष्ण कुमार उपस्थित हुए। सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद अब इस पूरे मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई अक्टूबर के अंत में निर्धारित की गई है, जिस पर सभी संबंधित पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।
निविदा में प्रक्रिया में निर्धारित संख्या में नए प्रावधानों को लेकर सामने आए विवाद के मामले हाईकोर्ट के फैसले के बाद संबंधित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निविदा प्रक्रिया में आवश्यक शर्तों और प्रावधानों के पालन पर टिप्पणी की थी। प्रक्रिया में निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका थी।
हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है। याचिका में हाईकोर्ट के फैसले तथा उसमें किए गए कानूनी निष्कर्षों को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर रोक है। हालांकि, इससे हाईकोर्ट का फैसला अंतिम रूप से निरस्त नहीं माना गया है। प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।