

Amravati Drought: खरीफ सीजन में बारिश की कमी और अन्य सूखा प्रभावित मानकों के आधार पर जिले की सभी 14 तहसीलों में सूखे का 'ट्रिगर-1' अर्थात पहली कड़ी लागू कर दी गई है। राज्य सरकार ने सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के अनुसार खरीफ 2026 में सूखे की स्थिति का आकलन किया।
जून से अब तक हुई बारिश, वर्षा की कमी तथा अन्य सूखा प्रभावित कारकों को ध्यान में रखते हुए कृषि आयुक्त के अहवाल में राज्य की 265 तहसीलों में 'ट्रिगर-1' लागू होने की स्थिति स्पष्ट हुई। किसानों को विभिन्न रियायतों और उपाय योजनाओं का लाभमिलेगा। सूखे की स्थिति की गंभीरता निर्धारित करने के लिए प्रभावित फसलों के पंचनामे तत्काल शुरू करने के आदेश जिलाधिकारी को दिए गए हैं।
जिले में अमरावती, भातकुली, चांदूर रेलवे, नांदगांव खंडेश्वर, धामणगांव रेलवे, अचलपुर, अंजनगांव सुर्जी, तिवसा, धारणी, चिखलदरा, वरुड, मोर्शी, चांदूर बाजार और दर्यापुर इन सभी 14 तहसीलों का समावेश है। यानी जिले की कोई भी तहसील सूखे की पहली कड़ी से वंचित नहीं रही है।
संबंधित तहसीलों में फसल नुकसान का सर्वेक्षण कर पंचनामे की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी। सर्वेक्षण के दौरान फसलों की वर्तमान स्थिति के फोटो और जीपीएस समन्वय एकत्र किए जाएंगे। फसल स्थिति की रिपोर्ट कृषि आयुक्त के माध्यम से सरकार को भेजी जाएगी। इसी आधार पर आगे की सहायता प्रक्रिया शुरू होगी।
सूखाग्रस्त तहसीलों में भूमि राजस्व में छूट और फसल कर्ज के पुनर्गठन का प्रावधान किया गया है। खेती से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक रहेगी। कृषि पंपों के बिजली बिल में भी रियायत दी जाएगी। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ किया जा चुका है, जबकि इससे अधिक क्षमता वाले पंपों के बिल में रियायत लागू होगी। सूखा प्रभावित गांवों में किसानों के कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति काटने पर भी रोक रहेगी।
स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क में माफी दी जाएगी। रोजगार गारंटी योजना के तहत काम के मानकों में छूट देकर अधिक काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।
जरूरत के अनुसार सूखाग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों और मजदूरों के लिए अनाज तथा पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था की जाएगी। जलसंधारण के काम शुरू कर उपलब्ध जलस्रोतों को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सांसद बलवंत वानखडे ने कहा कि अब पंचनामे की प्रक्रिया में बिना किसी विलंब के पूरी की जाए और वास्तविक रूप से नुकसान ग्रस्त किसानों को कितनी और कब तक आर्थिक सहायता मिलेगी, इस संबंध में सरकार स्पष्ट निर्णय ले। किसानों को केवल रियायते ही नहीं, बल्कि फसल नुकसान की मात्रा के अनुसार तत्काल आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। पंचनामे की प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई जाए, यही अपेक्षा है।
'ट्रिगर-1' लागू होने से सूखा प्रभावित उपाय योजनाएं और रियायतें शुरू हो गई हैं। हालांकि, फसल नुकसान के लिए आर्थिक सहायता का निर्णय अभी अलग से लिया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भरपाई के संबंध में स्वतंत्र शासन निर्णय जारी होगा।