अकोला  शहर में पीएम आवास योजना का कार्य धीमा, 50 हजार लाभार्थियों के आवेदन खा रहे धूल

अकोला में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 50 हजार लाभार्थियों के आवेदन धूल खा रहे हैं। प्रशासन की निष्क्रियता से किराएदारों और भूमिहीनों को घर नहीं मिल पा रहा है।
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Akola News: अकोला शहर के किराएदार और भूमिहीन नागरिकों को उनके हक का घर देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना शहर में काफी मंद गति से चलाई जा रही है. करीब 50 हजार लाभार्थियों के आवेदन जमा होने के बावजूद आज तक उनकी छानबीन तक नहीं हुई है. प्रशासन की इस निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

महंगाई के चलते शहर के किराएदार हर महीने 3 हजार से 10 हजार रुपये तक किराया चुकाने को मजबूर हैं. कई घर मालिक अचानक घर खाली करने को कह देते हैं, जिससे परिवारों को बारबार स्थानांतरित होना पड़ता है. इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है और आम नागरिक आर्थिक व मानसिक तनाव झेल रहे हैं.

अकोला महानगरपालिका ने कुछ वर्ष पहले शिविर आयोजित कर किराएदार लाभार्थियों के आवेदन भरे थे, लेकिन उसके बाद न छानबीन हुई, न ही कोई आगे की प्रक्रिया. प्रशासन केवल लिखित उत्तर देकर टालमटोल कर रहा है. बताया जाता है कि किराएदार और भूमिहीनों के लिए एएचपी घटक के तहत चार विस्तृत परियोजना रिपोर्टें सरकार को भेजी गई हैं, परंतु ये प्रस्ताव पिछले पांच वर्षों से सरकार स्तर पर प्रलंबित हैं.

इस कारण केंद्र और राज्य सरकार के हर किसी को घर के वादे की अकोला में धज्जियां उड़ रही हैं. सामाजिक कार्यकर्ता ऋषभ काले ने मांग की है कि शहर की सरकारी जमीनों की जांच कर अतिक्रमण हटाया जाए और उन्हीं जगहों पर किराएदार लाभार्थियों के लिए घरकुल योजना लागू की जाए. साथ ही घर निर्माण के लिए आवश्यक निधि तुरंत मंजूर कर परियोजना को मार्ग पर लाया जाए.

हक के घर के लिए अब वास्तविक कार्रवाई जरूरी

नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देकर पीछे हट रहा है. यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो घरकुल योजना केवल सपना बनकर रह जाएगी. इसलिए सरकार से मांग की जा रही है कि प्रलंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता देकर जल्द से जल्द पूरा किया जाए और आम नागरिकों को उनका हक का घर उपलब्ध कराया जाए.

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