भीषण गर्मी में बालापुर तहसील के गांवों में जलसंकट, प्रशासनिक उपाय योजनाएं कागजों तक सीमित

बालापुर तहसील के गांवों में भीषण गर्मी के बीच जलसंकट विकराल रूप ले चुका है। प्रशासनिक उपाय योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, जबकि नागरिक पानी के लिए भटक रहे हैं।
akola-1690
Published on
Updated on

Akola District: एक ओर सूर्य आग बरसा रहा है और अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है, वहीं बालापुर तहसील के अनेक गांवों के नागरिकों को पानी के लिए भटकने की नौबत आ गई है. अप्रैल माह समाप्ति की ओर है और मई का तपता मौसम अभी शेष है. इस भीषण गर्मी में जनजीवन त्रस्त हो चुका है. बालापुर तहसील के कई गांवों में जलसंकट विकराल रूप धारण कर चुका है.

लोहारा गांव में स्थिति अत्यंत गंभीर है, जहां महीने में केवल दो बार पानी की आपूर्ति हो रही है. नियोजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ग्रामवासी पानी के लिए परेशान हो रहे हैं. इसी प्रकार कवठा गांव में वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या आज भी जस की तस है. यहां नागरिकों को नदी के पात्र में गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ रहा है. कई गांवों में यही स्थितिबालापुर तहसील के बहादूरा, कान्हेरी गवली, नांदखेड, टाकली खुरेशी, भरतपुर, नकाशी, खंडाला, कोलासा, खिरपुरी बु., चिंचोली गणू, जोगलखेड, देगाव, बारलिंगा, मांडोली, वाडेगांव, व्याला, हाता, अंदूरा आदि लगभग 20 गांवों में भीषण जलसंकट की स्थिति है.

प्रशासन ने इन गांवों के लिए 23 उपाय योजनाएं तैयार की हैं, जिनमें से कुछ को मंजूरी भी दी गई है. परंतु वास्तविकता यह है कि वर्षों से इन योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाया है. लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता का गला आज भी सूखा है. कागजों पर काम पूर्ण दिखाकर लाभ उठाने की कोशिशें होती रही हैं, जबकि प्यासे नागरिकों को राहत नहीं मिली है. जनजीवन अस्तव्यस्त गांवों में पानी की कमी से जनजीवन अस्तव्यस्त हो चुका है. प्रशासनिक अधिकारी केवल कागजी घोड़े नचाने में व्यस्त हैं और राजनीतिक नेता घोषणाओं की बरसात कर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. इस भीषण गर्मी में जल संकट ग्रस्त जनसामान्य की पीड़ा प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है.

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com