

Akola News: कांग्रेस की पूर्व मंत्री एड. यशोमती ठाकुर ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर सत्ताधारी दल चुनाव क्षेत्रों की पुनर्रचना का राजनीतिक एजेंडा चला रहा है. उन्होंने दावा किया कि नारीशक्ति विधेयक का मूल उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को बदलना है. स्वराज्य भवन में आयोजित पत्र परिषद में ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक को अचानक फिर से चर्चा में लाने का कोई ठोस कारण नहीं है.
इसके पीछे चुनाव क्षेत्रों की पुनर्रचना और संवैधानिक बदलाव की नींव रखने का प्रयास है. उन्होंने इसे महिला वंदन नहीं बल्कि राजनीतिक दांव करार दिया. हाल ही में संसद में महिला आरक्षण सहित अन्य विधेयकों पर हुई चर्चा से राज्य में महायुति और महाविकास आघाडी के बीच आरोपप्रत्यारोप तेज हो गए हैं. विशेष रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष और तीव्र हुआ है. ठाकुर ने कहा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण का रूप दिखाया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे सरकार की नीयत संदिग्ध है. लंबे समय तक विधेयक को लंबित रखने के बाद अचानक इसे आगे लाना सरकार की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है.
पत्रपरिषद में मिलिंद चिमोटे, लक्ष्मण घुमरे, अशोक आमानकर, प्रकाश तायडे, प्रशांत वानखडे, पूजा काले, बबनराव चौधरी, प्रदीप वखारिया, एड. महेश गणगणे, कपिल रावदेव, जीशान हुसैन, सुधीर ढोणे, तश्वर पटेल उपस्थित थे. सीधे लागू करने की मांग महिला आरक्षण को कांग्रेस का पूर्ण समर्थन बताते हुए ठाकुर ने मांग की कि इसे वर्तमान लोकसभा और विधानसभा चुनाव क्षेत्रों की चौखट में ही लागू किया जाए.
यदि पुनर्रचना करनी ही है तो वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार स्वतंत्र आयोग के माध्यम से होनी चाहिए. जातिनिहाय जनगणना के बिना सामाजिक न्याय अधूरा ठाकुर ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए जातिनिहाय जनगणना अपरिहार्य है. यदि वास्तव में संतुलित आरक्षण देना है तो पहले वास्तविक स्थिति समझना आवश्यक है. उन्होंने महिलाओं के नाम पर राजनीति करने के बजाय ठोस नीतियाँ लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया.कैप्शन अकोला. पत्र परिषद में विचार प्रकट करती हुई पूर्व मंत्री एड.यशोमती ठाकुर तथा अन्य कांग्रेसी नेता.