गैस सिलिंडर की कमी से चूल्हे फिर जलने लगे, अकोला में जलाऊ लकड़ी की मांग बढ़ी

गैस संकट के कारण अकोला में चूल्हे जलाने की मजबूरी, जलाऊ लकड़ी की कीमतें बढ़ीं, पर्यावरण पर खतरा।
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Akola News: आखाती देशों में युद्धजन्य हालात के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलिंडरों की भारी कमी हो गई है. सिलिंडर न मिलने से आम नागरिकों के रसोईघर का संकट गहराया है.

मजबूरी में कई परिवारों ने फिर से चूल्हे का सहारा लिया है. लेकिन जलाऊ लकड़ी की अचानक बढ़ी मांग ने पेड़ों की कटाई को भी बढ़ावा दिया है.बाजार में जलाऊ लकड़ी के दाम 800 से 950 रु. प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं.

महंगी लकड़ी के कारण लोग खुले स्थानों, खेतों और सड़कों किनारे लगे पड़ों पर कुल्हाड़ी चला रहे हैं. वन विभाग ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति पेड़ काटने पर जुर्माने के साथ साथ एक साल तक की कैद हो सकती है.

अवैध पेड़ कटाई पर कड़ी सज़ा का प्रावधान वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र पेड़ कटाई नियंत्रण अधिनियम के तहत बिना अनुमति पेड़ काटना गंभीर अपराध है. एक पेड़ की अवैध कटाई पर 50 हजार रु. तक का जुर्माना और एक वर्ष तक का कारावास हो सकता है.

साथ ही, लकड़ी की ढुलाई के लिए भी ट्रांज़िट पास अनिवार्य है. बिना पास लकड़ी ले जाने वाले वाहनों को ज़ब्त कर संबंधितों पर मामला दर्ज किया जाएगा.

गैस संकट से गृहिणियों की मुश्किलें आखाती देशों में युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है. आयात घटने से स्थानीय बाजार में एलपीजी गैस की कमी देखी जा रही है.

बुकिंग के 1520 दिन बाद भी सिलिंडर नहीं मिल रहा है. इस कारण गृहिणियों का बजट और रसोई का नियोजन पूरी तरह बिगड़ गया है.

कई घरों में मजबूरी में फिर से चूल्हे जलाए जा रहे हैं. पर्यावरण पर संकट महंगी जलाऊ लकड़ी के कारण रात के समय चोरीछिपे पेड़ों की कटाई हो रही है.हरेभरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने से पर्यावरणप्रेमियों ने चिंता जताई है.

नियमों के अनुसार, अपनी ज़मीन पर पेड़ काटने के लिए भी वन विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है.पेड़ काटने के बाद पांच नए पेड़ लगाने का शपथपत्र देना पड़ता है.लेकिन नागरिकों का झुकाव कानूनी अनुमति लेने की बजाय सीधे अवैध कटाई की ओर बढ़ रहा है.

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