साकोली: तालाबों का सम्राट शहर प्यासा; 300 में से 70 बोरवेल बंद, टैंकरों के भरोसे जनता

Sakoli Water Crisis: कभी तालाबों की समृद्धि के लिए प्रसिद्ध साकोली आज भीषण जलसंकट का सामना कर रहा है। शहर के 70 बोरवेल और 43 कुएं सूख चुके हैं, जिससे 29 हजार की आबादी टैंकरों पर निर्भर हो गई है।
akola-1584
Published on
Updated on

Bhandara District News: साकोली बांध गांव में और प्यास सूखे गले में यह कहावत इन दिनों तहसील पर सटीक बैठती नजर आ रही है। कभी तालाबों की समृद्धि के लिए पहचाने जाने वाला साकोली आज बूंदबूंद पानी के लिए जूझ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि तालाबों की तहसील कहलाने वाले क्षेत्र में अब पानी के टैंकरों के सहारे जीवन चल रहा है। तहसील के कई गांवों में जलसंकट ने विकराल रूप ले लिया है।

अप्रैल से ही भीषण गर्मी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है, जहां तापमान 43 डिग्री तक पहुंच चुका है। ऐसे में आने वाले मई और जून महीने प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े हैं। साकोलीसेंदूरवाफा नगर परिषद क्षेत्र में कुछ नगरसेवक अपने निजी खर्च पर टैंकरों से पानी उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था कितने समय तक चल पाएगी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

लगभग 29 हजार की आबादी वाले इस शहर में लोग पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। शहर की अधिकतर कुएं और बोरवेल सूख चुके हैं, जिससे पूरा क्षेत्र टैंकरों पर निर्भर हो गया है। 37 करोड़ की पानी योजना ठंडे बस्ते मेंनगर परिषद क्षेत्र में जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।

300 बोरवेल में से करीब 70 पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जबकि बाकी का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। 43 सार्वजनिक कुएं सूख चुके हैं और सौर ऊर्जा आधारित 41 पंप भी पर्याप्त पानी देने में असफल साबित हो रहे हैं।

तहसील के एकोडी, खैरलांजी, गडकुंभली, गोंडउमरी और पलसगांव जैसे कई गांवों में बनी पानी टंकियां भी निष्क्रिय हो चुकी हैं।

नागझिरा रोड की पानी टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है, वहीं सेंदूरवाफा श्रीनगर कॉलोनी की टंकी खुद पानी के लिए तरस रही है। लाखांदुर रोड पर बन रही नई टंकी का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि 37 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जल आपूर्ति योजना धन के अभाव में ठप पड़ी है।

वर्षों से पानी संकट झेल रहे साकोली की स्थिति में यदि अब भी सुधार नहीं होता, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि गर्मी से पहले ही नियोजन क्यों नहीं किया जाता। कोट तेजी से गिर रहा भूजल स्तरभूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और बोरवेल व कुएं बेकार हो रहे हैं।

उनके प्रभाग के लोग पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हैं। सरकार से अतिरिक्त टैंकर और विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग की है। विवेक सोनू बैरागी, नगरसेवक। कोटन घबराएं प्रभाग 10 के नागरिक प्रभाग 10 में जल स्रोत अधिक होने के कारण घबराने की जरूरत नहीं है।

समयसमय पर पानी की आपूर्ति की जाएगी और नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। साथ ही उन्होंने शासन के सहयोग को भी जरूरी बताया।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com