अकोला संतों के आशीर्वाद से ही संभव है भगवंत की प्राप्ति, रामायणाचार्य रामराव महाराज ढोक ने दी कृपा की सीख
Ramrao Maharaj Dhok News: अकोला के अंत्री मलकापुर में श्रीगुरु श्रीराम महाराज के जन्मशताब्दी महोत्सव पर रामराव महाराज ढोक ने कहा कि कृपा सर्वोच्च शक्ति है, जो केवल संत संगति से ही प्राप्त होती है।
Akola Kirtan Mahotsav News: अकोला जगत में सबसे श्रेष्ठ कुछ हो तो वह कृपा है! कृपा के बिना अन्य कोई चीज श्रेष्ठ नहीं। कृपा में सर्वोच्च शक्ति समाई हुई है। जिस पर कृपा हो जाती है, वह सर्व दृष्टि से जगतजेया बन जाता है। तथापि यह कृपा संत संगति से प्राप्त होती है। संतों के कारण ही भगवंत की प्राप्ति होकर जीवन कृतार्थ होता है, ऐसा हितोपदेश रामायणाचार्य रामराव महाराज ढोक ने दिया।
श्रीगुरु श्रीराम महाराज मेहुणकर की जन्मशताब्दी महोत्सव में निंबा फाटा क्षेत्र के अंत्री मलकापुर में चल रहे राज्यस्तरीय कीर्तन महोत्सव में रामायणाचार्य रामराव महाराज ढोक ने कीर्तन का चतुर्थ पुष्प प्रस्तुत किया। संत नामदेव महाराज के अभंग पर उन्होंने सुंदर निरूपण कर संतों के लक्षण की जानकारी दी।
वे बोले, कृपा में कितनी शक्ति है, यह कृपा करने वाले को भी मालूम नहीं होती। जिन्होंने हनुमान पर कृपा की, वे भगवान श्रीराम लंका के लिए सेतु पर चलते गए, और जिस पर कृपा हुई, वह हनुमान एक क्षण में उड़ान भरकर लंका पहुंच गया।
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यह कृपा की अनुभूति है, ऐसा रामराव ढोक महाराज ने इस बार बताया। ऐसी इस कृपाशक्ति की महिमा बड़ी विचित्र और चमत्कारिक शक्तियों से भरी होती है। भक्ति की मस्ती भक्त से पूछोवे बोले, शक्ति की मस्ती क्या होती है यह पहलवान से पूछो, भक्ति की मस्ती कैसी होती है यह भक्त से पूछो, अपनी छोटी संतान की शरारत कैसी होती है यह मां से पूछो!
इसलिए कृपा की अनुभूति बहुत बड़ी होती है और ऐसी कृपा संतों के आशीर्वाद से भगवान प्रदान करते हैं। रामराव महाराज आगे बोले, भगवान की इच्छा भक्त पर कृपा करने की न हो तो भी संत मध्यस्थ बनकर अपने भक्त पर भगवान का अनुग्रह प्राप्त करा देते हैं।
इसलिए संत सद्गुरु शक्ति की ऊर्जा हैं और शाश्वत कल्याण की इच्छा रखने वाले भक्तों को संतों की संगति यानी सत्संग कर ऐसी कृपा प्राप्त करनी चाहिए, ऐसा आह्वान उन्होंने कीर्तन में किया।
पाइंटर तैयार किए 100 वारकरी सर्वप्रथम श्रीराम महाराज का परिचय देते हुए उन्होंने वै। श्रीराम महाराज की थोरवी प्रतिपादित की। वे बोले, विदर्भ में सौ कीर्तनकार तैयार कर वारकरी परंपरा को बड़े स्तर पर स्थापित करने का प्रयास श्रीराम महाराज ने किया।
ऐसे संतों का शताब्दी महोत्सव कीर्तन सप्ताह के रूप में हो रहा है, जिससे यह भूमि पावन हो गई ऐसा उन्होंने कहा। कीर्तन के उत्तरार्ध में संत नामदेव के अभंग पर उन्होंने सुंदर निरूपण कर संतों के लक्षणों की मीमांसा की।
