अकोला मनपा में सियासी संग्राम तेज, उद्धव गुट के 4 नगरसेवक शिंदे गुट में शामिल

मनपा में शिवसेना उद्धव गुट के नगरसेवकों का शिंदे गुट में प्रवेश, कानूनी पेच और अपात्रता की तलवार लटक रही है।
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Akola Municipal Corporation: अकोला महानगर पालिका में शिवसेना उद्धव गुट के चार नवनिर्वाचित नगरसेवकों ने शिंदे गुट में प्रवेश करने के बाद राजनीतिक संघर्ष और तीव्र हो गया है. लेकिन संबंधित नगरसेवकों ने अभी तक स्वतंत्र गुट की आधिकारिक पंजीयन नहीं की है, जिसके चलते उनकी स्थिति कानूनी रूप से पेचीदा हो गई है.

अब उनके ऊपर व्हिप उल्लंघन और अपात्रता की तलवार लटक रही है. महापालिका चुनाव में उद्धव गुट के टिकट पर विजयी हुए सागर भारुका, मनोज पाटिल, सुरेखा काले और सोनाली सरोदे ने खुले तौर पर शिंदे गुट में प्रवेश किया है. लेकिन कानून की दृष्टि से ये चारों नगरसेवक अभी भी मूल पक्ष के सदस्य ही माने जाते हैं.

ऐसे में उन पर उद्धव गुट का व्हिप लागू होगा. इसी बीच महापालिका में उद्धव गुट ने विजय इंगले को गुटनेता पद पर नियुक्त कर आक्रामक भूमिका अपनाई है. इंगले के माध्यम से जल्द ही आधिकारिक व्हिप जारी होने की संभावना है. यदि संबंधित नगरसेवक पार्टी की भूमिका के विरुद्ध मतदान करते हैं तो उनके खिलाफ अपात्रता की कार्रवाई हो सकती है. कानून के अनुसार स्वतंत्र गुट स्थापित करने के लिए आवश्यक सदस्य संख्या और आधिकारिक मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है. लेकिन वर्तमान में इन चार नगरसेवकों ने ऐसी कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की है.

इसलिए उनका गुटबदल केवल राजनीतिक स्तर पर सीमित है और कानूनी मान्यता मिलने तक उसे मान्यता नहीं दी जाएगी. अपात्रता और गुट मान्यता पर हरकत की संभावनाइस पृष्ठभूमि में उद्धव गुट ने आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कर संबंधित नगरसेवकों के खिलाफ अपात्रता की कार्रवाई की तैयारी शुरू की है. साथ ही गुट मान्यता पर हरकत लेने का भी निर्णय लिया जा सकता है. दूसरी ओर शिंदे गुट भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है. आगामी समय में महापालिका की सत्ता समीकरणों पर इन घटनाक्रमों का बड़ा असर पड़ने की संभावना है.

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